सरकार ने विदेश से एक मशीन मंगाई, जो जाँच करके यह बताती थी कि उसके पायदान पर खड़ा किया गया व्यक्ति लोकतन्त्र का दोस्त है या दुश्मन?
विभागीय मंत्री ने मशीन की जांच के लिए सबसे पहले व्यवस्था विरोध के आरोप में बन्दी एक युवक को खड़ा किया। मशीन की स्लाइड पर हरे रंग में उभरा–दोस्त।
मंत्रीजी समेत सभी जाँचकर्ता हैरान हो उठे। कुद्ध होकर आखिर मंत्रीजी खुद पायदान पर जा विराजे। स्लाइड पर लाल रंग मे उभरा–दुश्मन।
मंत्रीजी कोध से आगबबूला हो उठे और नोट लगाया – हिन्दुस्तान के क्लाइमेट में फिट नहीं, रिवर्स–रीडिंग देती है; इसलिए वापस जाए और भविष्य में भूल से भी न मँगाई जाए।
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