विवेक कपूर ने जब एक पत्रिका में मनीषा मिश्रा का स्त्री- विमर्श पर लेख पढ़ा, तो उसके नए तर्कों और सहज सरल भाषा से प्रभावित हो कर लेख के साथ दिए गए ईमेल एड्रेस पर रचनी की प्रशंसा के कुछ शब्द लिख दिए। कपूर स्वयं रचनाशील लेखक व पत्रकार हैं और संभावना शील व उदीयमान रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहना उनका स्वभाव है। तीन चार दिन बाद उन्हें रचना का वापसी ई-मेल मिला जिसमें उसने लिखा कि वह उनकी रचनाएँ पढ़ती रही हैं और उन जैसे प्रतिष्ठित लेखक की सराहना पाकर वह स्वयं को धन्य मानती हैं। इसी क्रम में अनेक लेखक- लेखिकाएँ फ़ेसबुक पर भी उनके फ्रेंड बन गए थे। मनीषा मिश्रा का नाम भी कुछ दिन बाद कपूर जी की फ्रेंड लिस्ट में जुड़ गया।
रिटायर जीवन बिता रहे विवेक कपूर का समय इन रचनाकार व पत्रकार मित्रों से वैचारिक और साहित्यिक चैटिंग में प्रसन्नतापूर्वक बीत रहा था। उनकी पत्नी का कई साल पहले देहांत हो गया था। उनका एक ही बेटा था जो विदेश में रहता था। उनकी गृहस्थी नौकरों के भरोसे ही चल रही थी। मनीषा अपने लेखन के साथ साथ व्यक्तिगत समस्याओं पर भी उनसे चर्चा कर लेती थी। कपूर उसे बेटी कह कर संबोधित करने लगे और मनीषा उन्हें अंकल लिखने और कहने लगीं। कभी- कभार फ़ोन पर भी बात हो जाती।
एक दिन शाम को पार्क में सैर करते हुए पत्थर से पैर टकराने से विवेक कपूर पक्के फ़र्श वाले वाक वे पर गिर पड़े। वहाँ घूम रहे लोगों ने भाग कर उन्हें उठाया पर उनसे चला नहीं जा रहा था। उनके पड़ोसी सहारा देकर उन्हें घर तक ले गए। घर पहुंचते ही उन्होंने सोसायटी में ही रहने वाले मित्र प्रियदर्शन को फ़ोन करके चोट लगने की खबर दे दी। कोई दोस्त भला ऐसे मौक़े पर घर में कहाँ टिका रह सकता है! वह फौरन पहुँच कपूर के घर पहुँच गए और उन्हें अस्पताल ले गए। एमरजेंसी में जब एक्स-रे, एम आर आई जैसे टेस्ट हो रहे थे तो प्रियदर्शन ने बेड पर लेटे कपूर साहब का मोबाइल पर फ़ोटो लेकर उनके घायल होने की सूचना फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दी। डाक्टरों ने कुछ दवाएँ दीं और अगले दिन आपरेशन करने की बात कही।
अगली सुबह विवेक कपूर अस्पताल के बेड पर चाय पी रहे थे कि एक
दंपती उनके सामने आ खड़ा हुआ। दोनों ने एक साथ कहा- ‘अंकल नमस्ते , कैसे
हैं? कपूर साहब ने संकोच करते हुए कहा- माफ करना बेटे, मैंने पहचाना
नहीं। महिला ने उनके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा- पहचानेंगे कैसे, हम
क भी मिले ही नहीं। अंकल, मैं हूँ आपकी बेटी मनीषा मिश्रा। ये मेरे पति
डाक्टर समीर मिश्रा, आर्थो सर्जन। फ़ेसबुक पर आपके बोरे में देखा, तो
आपसे मिलने आ गए। हमारा अपना मल्टी क्लिनिक है। हम अपने क्लिनिक में आपका इलाज भी करेंगे और देखभाल भी’। तभी प्रियदर्शन भी वहाँ आ गए। पूरी कहानी सुन कर वे बहुत खुश हुए। डॉक्टर समीर ने अस्पताल से डिस्चार्ज कराने की
औपचारिकताएँ पूरी कीं और विवेक कपूर को एंबुलेंस में लिटाकर साथ ले गए।
एंबुलेंस चली तो कपूर साहब की आँखों से झर-झर आँसू बह निकले। उधर बगल
में बैठे प्रियदर्शन ऐसे अनोखे रिश्ते बनाने के लिए सोशल मीडिया पर गर्व कर रहे थे।
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