जून 2026

देशरूमाल     Posted: August 1, 2024

अनिल अपने ऑफिस में आवश्यक मीटिंग ले रहे थे। अपनी डायरी में जरूरी बातें नोट भी करते जा रहे थे । अचानक वे खड़े हो गए और कर्मचारियों से बोले –“सॉरी यह मीटिंग यहीं खत्म करनी पड़ेगी, एक बहुत जरूरी काम आ गया है”। मीटिंग समाप्त कर कार में बैठ लगभग घंटे भर का सफर तय करके माँ  के घर पहुंचे । देखा दरवाजे पर ताला लगा है। पड़ोस में रहने वालों ने बताया आपकी माँ  अस्पताल में दाखिल है। अस्पताल का पता पूछ अनिल वहाँ पहुँचे। पता लगा माँ  अति दक्षता कक्ष में दाखिल है और नीम बेहोशी की हालत में है। अनिल वहीं बैठ गए।

शाम को माँ  ने आँखें खोलीं, तो अनिल को सामने देख कातरता भरी नजरों से उसकी ओर देखा। अनिल ने आगे बढ़कर उनके हाथ पकड़ लिये और कहा –“ माँ कैसी हो..?” माँ को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि सामने उनका इकलौता बेटा खड़ा है। कुछ सामान्य होने पर बोली-“तुझे कैसे पता लगा मैं बीमार हूँ और अस्पताल में हूँ?” 

“माँ अभी आप आराम करो बातें बाद में कर लेंगे …”-कहकर अनिल ने माँ के चेहरे पर प्यार से हाथ फेरते हुए थपथपाया। वह कैसे बताए मीटिंग से पहले चाय पीते हुए जिस रूमाल से उसने हाथ पोंछे थे, वह माँ  ने ही बनाया था। माँ  ने उसे तीन वर्ष पहले दिया था , जिसे उसने बेकार समझ अलमारी में पटक दिया था। आज इत्तफाक  से हाथ में आया , तो उसे जेब में डाल ऑफिस आ गया था। उसके एक सिरे पर माँ  ने लिखा था—” कभी-कभी माँ  को याद करके मिलने से जिंदगी में पछतावे की टीस से बचा जा सकता है।”

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