जून 2026

संचयनलघुकथाएँ:राममूरत ‘राही’     Posted: January 1, 2020

1-बोहनी

            एक गरीब-से दिखने वाले वृद्ध से जनरल कोच में एक पुलिस वाले ने पूछा-‘‘टिकट दिखाओ।’’

            ‘‘तो चलो थाने….’’ इतना कहकर पुलिस वाले ने उस वृद्ध की बाँह पकड़ी और कोच के एक कोने में ले गया जहाँ पर कोई नहीं था। फिर बाँह छोड़ते हुए धीमी आवाज में बोला-‘‘लाओ दो सौ रुपए निकालो, नही ंतो थाने चलना पड़ेगा।’’

            ‘‘साब….दो सौ रुपये नहीं हैं।’’

            ‘‘ठीक है…सौ रुपये निकालो।’’

            ‘‘साब….सौ रुपए भी नहीं हैं।’’

            ‘‘अबे कुछ तो होगा? वही दे दो।’’ पुलिस वाले ने खीजकर कहां

            बुजुर्ग ने अपने हाथ में पकड़ी छड़ी एक तरफ रखते हुए, अपने कुरते की जेब में हाथ डालकर एक पाँच रुपए का सिक्का निकालकर पुलिस वाले को देते हुए कहा-‘‘लो साब….’’

            पुलिस वाले ने जाब पाँच रुपए का सिक्का देखा, तो वह गुस्से में भर उठा और बोला-‘‘अबे स्साले….भिखारी समझ रखा है क्या?’’

            वह बुजुर्ग डरता हुआ बोला,-‘‘नहीं साब….भिखारी तो मैं हूँ…. अभी हाल ही में डिब्बे में भीख माँगने आया था कि आपने मुझे पकड़ लिया। थोड़ी देर बाद पकड़ते तो शायद मैं आपको दो सौ रुपए दे देता। अभी तो मेरी बोहनी भी नहीं हुई ह,ैं ये पाँच रुपए का सिक्का तो कल का बचा हुआ है। इसे आप रख लो, आपकी बोहनी हो जाएगी।’’

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2-तीसरा झूठ

            बिट्टू चुपचाप मिठाई के डिब्बे में से मिठाई निकालकर खा गया। जब उसकी मम्मी ने डिब्बा देखा, तो बिट्टू से पूछा-‘‘बेटा! क्या तुमने इसमें से मिठाई ली है?’’

            ‘‘नहीं मम्मी! मैंने मिठाई नहीं ली है।’’ बिट्टू ने साफ इनकार कर दिया।

            ‘‘बेटा! मुझे मालूम है कि तुमने ही मिठाई ली है। तुम मेरे सामने पहली बार झूठ बोल रहे हो, इसलिए मैं तुम्हें समझा रही हूँ कि अब कभी झूठ मत बोलना।’’

            बिट्टू ने हाँ में गर्दन हिला दी।

            एक दिन फिर किसी बात पर बिट्टू ने अपनी मम्मी से दूसरी बार झूठ बोला, तो उसकी मम्मी ने उसे खूब डाँटा और हिदायत दी कि अब कभी झूठ बोला तो पिटाई करूँगी।

            बिट्टू ने अपनी मम्मी से वादा किया कि अब वह कभी भी झूठ नहीं बोलेगा।

            लेकिन कुछ दिनों बाद बिट्टू ने जब तीसरी बार झूठ बोला, तो उसकी मम्मी ने इस बार उसे ना ही डाँटा और न ही उसकी पिटाई की क्योंकि इस बार बिट्टू ने अपनी मम्मी के कहने पर ही मिसेज वर्मा से ये झूठ बोला था मम्मी घर में नहीं हैं, जबकि उसकी मम्मी घर पर ही थीं।

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3-ब्लॉक

            ‘‘किसका फोन था?’’ सुरेखा ने किचन में से पूछा।

            ‘‘पापा का था?’’ पति अमित ने बताया।

            ‘‘वे बीमार हैं। इलाज के लिए दस हजार रुपए माँग रहे थे।’’

            ‘‘कह देते पेड़ पर पैसे नहीं लग रहे हैं, जो तोड़ कर दे दंेगे। हम खुद ही परेशानी में हैं।’’ सुरेखा ने गुस्से में कहा।

            अमित ने आगे कुछ नहीं कहा और वह चुपचाप बाथरूम में नहाने चला गया।

            ‘‘आज मैं उनका नम्बर ब्लॉक किए देती हूँ, ताकि वे दोबारा फोन न लगा सकें।’’ सुरेखा गुस्से में किचन में से बड़बड़ाती हुई हॉल में आई  और जैसे ही मोबाइल उठाकर नम्बर ब्लॉक करना चाहा, वह परेशान हो गई। क्योंकि वो जिस नम्बर को ब्लॉक करना चाहती थी, वो नम्बर अमित के पापा का नहीं, उसके खुद के पापा का था।

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4-अन्तहीन रिश्ते

            बस स्टॉप पर उतर कर, रुखसाना घर की तरफ तेज कदमों से जा रही थी। रास्ते में ही खबर मिली थी कि मन्दिर-मस्जिद के विवाद से शहर में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए हैं। जब वह एक गली से गुजर रही थी, तभी तीन शराबी युवक उसका रास्ता रोककर खड़े हो गए और उसके साथ छेड़खानी करने लगे।

            अचानक वहाँ एक ऑटो रिक्शा आकर रुका। जिसमें से दाढ़ी वाला ऑटो चालक उतरा, उसने उन तीनों शराबी युवकों को रोकते हुए कहा-‘‘क्यों बे! परेशान कर रहे हो इस लड़की को?’’

            ‘‘क्यों?….क्या…..ये तेरी बहन लगती…है? जो इसे बचाने चला आया…। अबे चला जा…यहाँ से…नहीं तो मैं तेरे हाथ पैर…तोड़ दूँगा…। शायद तू मेरा नाम….जानता नहीं है…। मेरा नाम….किशोरी…दादा है, समझे….।’’ उसमें एक दादा टाईप युवक ने लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा।

            ‘‘हाँ! मेरी बहन लगती है।’’ इतना कहकर, वह तीनों युवकों से भिड़ गया, थोड़ी देर में ही वे तीनों वहाँ से भाग निकले।

            रुखसाना ने उससे कहा-‘‘भाईजान! आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।’’

            ‘‘शुक्रिया की जरूरत नहीं है, चलो मैं तुम्हें घर छोड़े देता हूँ।’’

            ‘‘भाईजान! पास में ही मेरा घर है। आप क्यों परेशान हो रहें हैं? मैं चली जाऊँगी।’’

            ‘‘तुमने मुझे भाईजान कहा है। शहर में दंगे हो गए हैं। मेरा फर्ज बनता है कि एक भाई के नाते मैं तुम्हें हिफाजत के साथ, घर पहुँचा दूँ। चलो जल्दी से बैठो।’’

            रुखसाना ऑटो में बैठ गई। जब ऑटो रिक्शा उसके घर पहुँचा, तो उसका इन्तजार कर रही उसकी दादी ने उससे घबराते हुए पूछा-‘‘रुखसाना! तूने आने में देर क्यों कर दी? मैं कब से तेरा इन्तजार कर रही हूँ। क्या तूझे मालूम नहीं है कि शहर में दंगा हो गया है?’’

            ‘‘मालूम है दादी।’’ इतना कह कर रुखसाना ने उन्हें पूरी घटना बता दी। जिसे सुनकर उसकी दादी ने उस युवक की तरफ देखकर कहा-‘‘बेटा! अल्लाह ताला तुम्हारा भला करे। अच्छा हुआ तुमने इसे उन काफिरों से बचा लिया, नही ंतो वे लोग ना जाने मेरी मासूम पोती के साथ क्या सलूक करते।’’

            वह चुपचाप ऑटो रिक्शा स्टार्ट कर वहाँ से जाने लगा, तो रुखसाना की दादी ने उससे पूछा-‘‘बेटा! तुम कौन हो?’’

            ‘‘काफिर!’’ उसने संक्षिप्त-सा जवाब दिया।

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5-पराया खून

            ‘‘बेटा अशोक! मैं ये क्या सुन रही हूँ, तुम बहू को तलाक देने का सोच रहे हो?’’ यशोदा देवी ने अपने बेटे के दफ्तर जाने के  बाद से ही अपने कमरे में पड़ी हुई हैं।’’

            ‘‘माँ! शादी को दस साल हो गए हैं। अभी तक हमारी कोई सन्तान नहीं हुई है। मैंने अपना और उसका चेकअप करवाया था। डॉक्टर ने मुझमें नहीं उस में खराबी बताई है कि वह कभी भी माँ नहीं बन सकती है।’’

            ‘‘लेकिन-वेकिन कुछ नहीं माँ! मैं उसका इलाज करवाते-करवाते थक गया हूँ। मैं उससे तलाक लेना चाहता हूँ। हमें अपना वंश आगे बढ़ाना है।’’ अशोक ने माँ की बात बीच में काटते हुए कहा।

            ‘‘बेटा! मेरा कहा मान, बरखा को तू तलाक मत दे। हम अपना वंश आगे बढ़ाने के लिए अनाथाश्रम से एक बच्चा गोद ले लेंगे।’’

            ‘‘नहीं माँ! मुझे अपना ही खून चाहिए पराया नहीं।’’

            यशोदा देवी ने दीवार पर लगी अशोक की बचपन की तस्वीर पर हाथ फेरते हुए कहा-‘‘बेटा! अगर तेरे पापा भी, तेरे जैसा ही सोचते, तो तू आज इस घर में नहीं होता।’’

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