लघुकथा विमर्श के रूप में लघुकथा.com मेरी पसंद -5 प्राप्त हुई, जिसका संपादन सुकेश साहनी जी और रामेश्वर काम्बोज जी ने किया है। जो विधा हमें अतिप्रिय होती है, उसके बारे में कुछ भी पढ़ना, जानना परमसुख प्रदान करता है। लघुकथा- विमर्श को लेकर इन दिनों बहुत कुछ पढ़ने में आ रहा है और रुचिकर भी लगता है। लेकिन लघुकथा.com मेरी पसंद के माध्यम से पाठकों की जो प्रतिक्रियाएँ मिली हैं, पाठकों के जो विचार हैं; वे लेखन की भी नई राह दिखाते हैं; क्योंकि कोई भी रचना जब एक पाठक के नजरिए से देखी जाती है, तो उसे पढ़ना, उस लघुकथा के बारे में और अधिक जानना अनूठा अनुभव है। हर एक पाठक या लेखक ने दो-दो लघु कथाओं पर जो टिप्पणियाँ की हैं, मैं मानती हूँ कि वे मेरे लिए भी बहुत उपयोगी हैं। एक पाठक की दृष्टि से किसी भी लघुकथा का रचनात्मक मूल्यांकन लघुकथा पढ़ने के लिए भी प्रेरित करता है।
इसे मुझ तक, पाठकों तक पहुँचाने के लिए मैं आप दोनों महानुभावों का आभार प्रकट करती हूं।
ज्योति जैन