चौथा पुरस्कार प्राप्त लघुकथा
रेलवे प्लेटफॉर्म पर मेरे पास खड़े उस साधारण से आदमी ने जैसे ही बीड़ी का बंडल जेब से निकाला, मैंने जोर से उसे टोक दिया,‘अब्बे, स्टेशन पर बीड़ी पिएगा तो पकड़ा जाएगा, पैनल्टी भरनी पड़ेगी।’ घबराकर सहमति में सिर हिलाते हुए उस आदमी ने बंडल वापस जेब में डाल लिया।
स्थिति निहार तेजी से हमारे पास आता एक वर्दीवाला, बीड़ी के बंडल को फिर जेब में जाता देख एकाएक हड़बड़ा गया।
मैंने प्रशंसा की उम्मीद में वर्दीवाले की ओर देखा लेकिन उसकी कहर भरी निगाहें मेरे चेहरे पर तीव्र से तीव्रतम होती चली गईं।
-0-
मो : 9224816096