“ईद मुबारक!”
“मुबारक! मुबारक!”
“हम एक-दूसरे को मुबारक दे रहे हैं और हमारे लोग शहर में कत्लेआम मचाए हुए हैं, तो क्या हम भी लड़ें?”
“हम क्यों लड़ें?”
“शहर में दंगा जो चल रहा है।”
“यह भी कोई वजह हुई?”
“हिंदू लोग मुसलमानों को गाजर-मूली की तरह काट रहे हैं।”
“वे बेवकूफ हैं!”
“मुसलमानों ने भी कत्लेआम मचा रखा है!”
“वे जाहिल हैं।”
“मुझे शक है कि कहीं आप मुझे न मार दें।”
“मुझे भी शक है कि आप…।”
“न…न.. मेरा मन नहीं मानता। आपके बहुत एहसान हैं मुझ पर!”
“आपने भी तो कुछ कम नहीं किया मेरे वास्ते!”
“आप सच्चे मुसलमान हैं!”
“आप सच्चे हिंदू हैं!”
“आपकी ज़र्रानवाज़ी है…आप बहुत प्यार करते हैं मुझे।”
“आपका दिल भी तो दरिया है!”
“फिर भला हम कैसे लड़ सकते हैं?”
“हमें लड़ना भी नहीं चाहिए।”
“भगवान बड़ा मेहरबान है!”
“खुदा की मेहरबानी सबसे बड़ी मेहरबानी है!”
“खुदा नहीं भगवान!”
“भगवान नहीं खुदा…!”
“मैं कहता हूँ, भगवान…!”
“मैं कहता हूँ, खुदा…!”
“नहीं भगवान!”
“नहीं खुदा!”
“भगवान!”
“खुदा!”
“नहीं भगवान…. नहीं खुदा….. न खुदा न भगवान…. न… भगवान न खुदा… खुद न भगवान…. भगवान न खुदा… खुदा न भगवान न भगवान न खुदा न खुदा न भगवान है…।”
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