जून 2026

संचयनशिनाख्त     Posted: May 1, 2015

दंगों के बाद चौराहे पर एक लाश मिली थी, जिसकी पीठ में छुरा भोंका गया था।
‘‘लाँग वाली धोती तो पहनी नहीं है, जनेऊ भी नहीं है, बदन पर….। हिन्दू तो लगता नहीं है।’’
‘‘अचकन या अलीगढ़ कट पायजामा भी नहीं पहने है….। मुसलमान भी तो नहीं दिखता…।’’
‘‘अरे, अब नई पीढ़ी तो पैन्ट शर्ट पहनती है। ऐसे हिन्दू- मुस्लिम की पहचान थोड़े होगी।’’
‘‘तो, फिर ये…है…कौन?’’
‘‘अरे, होगा कोई गरीब आदमी। देखते नहीं बदन पर केवल कच्छा है….वह भी…फटा हुआ।’’
-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine