जून 2026

भाषान्तरशुद्ध जात/ जाति थाती     Posted: June 1, 2023

गढ़वाली अनुवाद : डॉ. कविता भट्ट

        सासुजी  मीं मूँ रौणौ आँणि छै । औं तैं नहौण धुलौण घुमौण, कपड़ा लत्ता, खाणों सब्बि काम मि पर ही पंण छा ।थोड़ा कठिन लगी । याँका कारण मिन नौकरियांण ढूँढण शुरु कर दे । पर मिली ई नी। तबि पता चली गळी का सफ़ाई कर्मचारी की पन्द्रह – सोलह बर्सै नौनी च। वीं की दगड़ बात करी त वु वीं तैं काम पर भेंजणौ तैं तैयार ह्वे गी । मिन वे तैं समझै द्याइ  कि वु कै तैं  बताऊ ना कि वेकी बेटी इख काम करदि च। सासुजी तैं त बिलकुल ई पता नी चल्यूँ चैन्दू ।

         राधा सासुजी का सब्बि काम पूरा मन सि करदी । वूँ का ई कमरा म सेन्दि छै। सासुजी ख़ुश छै अर मि निश्चिंत ।

                कई मैना बिति गेनि। एक दिन मि घौर म नि छौ । वे दिन राधा कु भाई घौर पर ऐ गे। क्वी रिश्तेदार अयाँ छा अर वेकी माँ न वे तैं घौर बुलै छौ । वींका भाई बिटि सासुजी तैं पता चलि गे कि राधा कैं जातैं च । मि सासुजी क समणी जाण से डन्नु छौ कि वूंका गुस्सा तैं कनक्वे झेली सक्लु । वु  ठैरी जात- पात, छुआ-छूत म विश्वास कन्न अर नित्य नियम कन्न वाळि जनानी ।

  वूँन मि तै बुलाई। मि डरदु डरदु वूं मूं गयौं। वूँन  बोलि ,”ब्वारी , तु जाणदी छै कि राधा कैं जातै कि छै ।”

” जी सासुजी” मिन छुट्टू सि जवाब द्याई।

“क्वी बात नी च ब्वारी, जब अपड़ा सेवा नी करि सक्वन त परायों की क्य जात, जु सेवा करू  वि च जाति थाती ।

-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine