Shyam Sunder Aggarwal बड़े भाई जैसे थे आत्रेय जी। उनके अचानक चले जाने से बहुत धक्का लगा है। उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। सादर नमन। विनम्र श्रद्धांजलि!

Rameshwar Kamboj Himanshu बहुत दु;खद समाचार । आत्रेय जी बहुत ही विनम्र, वरिष्ठ होते हुए भी सबको प्रोत्साहित करने वाले, पढ़ी गई हर अच्छी रचना पर फोन करके लेखकों का मनोबल बढ़ाने वाले साहित्यकार । मेरी पहली भेंट रायपुर के लघुकथा सम्मेलन में हुई थी। तब से लगातार मिलते रहे। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित स्वर्ण जयन्ती समारोह में लघुकथा -सत्र की 18 मार्च 2017 को अध्यक्षता भी की थी, जिसमें श्री सुकेश साहनी जी मुख्य वक्ता थे। सभा-कक्ष भरा हुआ था। उसके बाद निदेशक कुमुद बंसल जी द्वारा आयोजित अकादमी के अन्य कार्यक्रमों में भी मिलना हुआ। ऐसे उदार व्यक्ति मिलना कठिन हैं। मेरे प्रति उनका स्नेह -भाव बहुत गहरा था। उनका जाना साहित्य की बहुत बड़ी क्षति है। प्रभु उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और परिवार को यह असह्य दु;ख सहन करने की शक्ति प्रदान करे ।

Sukesh Sahni बड़े भाई जैसा,सच्चा, सहृदय साहित्यकार मित्र चला गया। इस रिक्तता को भर पाना मुश्किल। दूरभाष पर लम्बी साहित्य चर्चा होती थी। वे अपनी बेबाक़ प्रतिक्रिया देते थे। राधे श्याम भारतीय और अरुण कुमार के साथ मैं भी विमर्श में शामिल रहता था।अभी तो आपको बहुत काम करना था उन्हें। नमन!!
Satish Raj Pushkarna Wo jitne achche Laghukathakar the utne hi shreshth vyakti the.Unki punya smrition ko pranam!
Mukesh Sharma दुखद समाचार।आत्रेय जी का जाना लघुकथा जगत की बड़ी क्षति है
Ashok Jain ओह दुखद समाचार । ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें । अभी तो घरौंडा मिले थे 14 तारीख़ को! उफ्फ़
Kumud Bansal ये अचानक कैसे हुआ । लगभग 20 दिन पहले ही आत्रेय जी खूब लंबी बात हुई थी
।साहित्य जगत की बहुत बड़ी क्षति है । श्रीहरि उन्हें निज श्रीचरणों में स्थान दें ।उनसे
सदैव बड़े भाई का स्नेह मिला ।
Balram Agarwal अत्यंत दुखद। दो दिन पहले ही उनसे लम्बी बातचीत हुई थी। आज सुबह ही कथादेश
संपादक हरिनारायण जी को किसी संदर्भ में उनकी लघुकथा ‘इक्कीस जूते’ सुनाई थी।
ईश्वर उनकी पवित्र आत्मा को शान्ति प्रदान करे। ॐ शांति।

Ashok Bhatia बहुत दुखद खबर है।सरल,निश्छल,बड़े भाई समान श्री आत्रेय से पांच-छः दिन पहले ही बात हुई थी।सर पर चोट ही शायद ले गई उनको।लघुकथा के लिए बड़ी क्षति है।अक्सर हम गोष्ठियों में इकट्ठे ही जाते थे।कभी अकेला निकल जाऊं,तो बड़े अपनेपन से शिकायत करते थे।हरदम हंसमुख।आँखें नहीं रही थीं,पर वे तो थे।मेरे लिए श्री आत्रेय का जाना बहुत बड़ी व्यक्तिगत क्षति भी है।विनम्र श्रद्धांजलि।
Dipak Mashal राम कुमार आत्रेय जी की लघुकथाओं से सबसे पहले लघुकथा.कॉम पर मुख़ातिब हुआ था। लगभग तभी से उनकी लघुकथाओं से प्रभावित था और बहुत कुछ सीखा भी। उनके इस तरह अचानक जाने से उत्पन्न निर्वात को भरना बहुत मुश्किल है।
Martin John बेहद ग़मगीन खबर । माह भर पहले उनसे खूब लंबी बातचीत हुई थी । जब कभी मेरी प्रकाशित लघुकथाओं /रेखाचित्रों वाली पत्रिका मुझसे पहले पहुँच जाती तो फौरन ख़बर कर देते थे । सचमुच उनका इस तरह कूच कर जाना ग़मगीन कर गया । सशक्त और समर्थ लघुकथाकार हमने खो दिया । नमन ।

Yograj Prabhakar बेहद दुखद समाचार है। विश्वास नहीं हो रहा। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
दुलीचंद कालीरमन ॐ शांति । बच्चों जैसा सरल ह्रदय और उच्च मानव मूल्यों व रचनाधर्मिता के पक्षधर का यूँ चले जाना साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है
Kastoorilal Tagra शत-शत नमन । मेरा उनसे केवल एक बार रु ब रु मिलना
हुआ । वह ” प्रेरणा -अंशु ” मासिक पत्रिका के लघुकथा प्रतियोगिता में
पुरस्कृत हुए थे । उस सन्दर्भ में उन्होंने
उत्तराखंड के दिनेशपुर कस्बे में आकर लघुकथा पर अपने विचार रखे थे । जिनसे मैं बहुत
प्रभावित हुआ था । आप ( राधेश्याम भारतीय जी ) भी उनके साथ आये थे ।
उसके बाद निरंतर उनसे मोबाइल पर संपर्क बना रहा ।
बड़े साहित्यकार होते हुए भी वह सदैव विनम्र बने रहे । वह सच और सरल
व्यक्तित्व के स्वामी थे । मेरे एक संरक्षक और मित्र का जाना
, जहां साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है , वहीँ उनका जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है
। ॐ शान्ति … शान्ति… शान्ति ।
Sheel Kaushik अत्यंत दुखद समाचार।स्तब्ध हूँ। कुछ दिन पहले ही घरौंडा ( करनाल) में मिले थे। सदैव हँसते व आशीर्वचन लुटाते थे हम पति-पत्नी पर। क्या कहें नियति पर बस नहीं । विनम्र श्रद्धांजलि उनके चरणों में अर्पित करती हूँ।
Umesh Mahadoshi अत्यंत दुखद। बेहद सहज – सरल व्यक्तित्व थे आदरणीय आत्रेय जी। दो -तीन दिन पूर्व ही भाई नरेश उदास जी के साथ बातचीत में पता चला था कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
Shashi Bhushan Badoni बहुत दुखद खबर। मेरा उनसे लगभग गत 15-20 वर्षों से अत्यंत आत्मीय मित्रता थी।मुझे उनकी इधर की अश्वस्था की खबर नहीं हुई,।आज अचानक यह पढ़कर मै बहुत दुःखी महसूस कर रहा हूँ। मुझे अपने ऊपर यह ग्लानि भी हो रही है, कि मैने बहुत दिनों से उन्हें फोन भी नहीं किया था…! ईश्वर उनके परिवार को इस दुख को सहने की क्षमता प्रदान करे।विनम्र श्रद्धांजलि !!
Niraj Sharma वरिष्ठ लघुकथाकार आ. रामकुमार आत्रेय जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
उनकी लघुकथा इक्कीस जूते भ्रष्ट व्यवस्था को बखूबी उजागर करती है।उनसे
कई कार्यक्रमों के दौरान मुलाकात हुई। वे सब बातें याद आ रही हैं
Bhagirath Parihar वरिष्ठ लघुकथाकार रामकुमार आत्रेय जी को विनम्र श्रद्धांजलि