जून 2026

देशसंस्कार     Posted: July 1, 2019

“ओके मॉम, चलता हूँ”- मोबाइल पर नजरें गडाए हुए ही बेटे ने कहा।
” अरे बेटा! अभी  आए  और अभी जाने लगे ,कुछ देर हमारे साथ भी बैठो”- गाँव से मिलने आई बडी दादी ने कहा।
सॉरी दादी, फ्रेंड्स की घर पार्टी है,लेट हो जाऊँगा”
” मेरे मोबाइल में नेट पैक डलवा दिया? शाम तक खत्म हो जाएगा”- माँ ने कहा।
“ओहो मॉम ‘डलवा दिया है, कितनी बार पूछेगी,और हाँ मुझे  रात को आने में देर हो जाएगी, आप बार-बार फोन करके डिस्टर्ब मत करना,  मेरे दोस्त आपकी इस आदत के कारण मुझे मॉम्ज़ बेबी कहकर चिढ़ाते हैं”
” अच्छा ठीक है, नहीं करूँगी”
“अरे! दादी क्या देख रही हैं?आप नहीं  जानती मोबाइल कितना जरूरी है,  हम शहर वालों की तो यह जीवन रेखा  बन गया है।इसके बिना एक पल नहीं चलता “-उन्होंने  कहा।
“अच्छा” – बडी दादी ने आश्चर्य से मोबाइल को हाथ में लेते हुए कहा।
वे उस चौकोर जादुई डिबिया को बड़े अचरज से देख रही थी, जिस पर  उंगलियां फिराते ही एक अनोखी ही दुनिया में पहुंच जाते, जहाँ की हर चीज बहुत ही आकर्षक दिखाई दे रही थी।देखकर एकदम आंखें चौंधिया गई, “अरे!! अरे …यहाँ तो मैं भी हूँ  कितनी सुंदर, मुझे तो पता ही नहीं था कि मैं ऐसी भी दिख सकती हूँ”-,  सेल्फी की जादुई दुनिया का भ्रमण करते हुए बड़ी दादी कह उठी। 
यह सब  देखकर उन्हें चिराग  की याद हो आई, जिसे घिसने पर प्रकट होने वाला जिन्न हर इच्छा को एक क्षण में पूरा कर देता था।
“इस छोटे से खिलौने में पूरी दुनिया समाई हुई है। इसने हर काम को बहुत आसान बना दिया है।चाहे किसी को संदेश भेजना  , बात करना  या  चलते फिरते देखना,  सब चुटकियों में हो जाता है”
“क्या सच में?”- बडी दादी ने अचरज से कहा।
हाँ दादी,  किसी चीज की जानकारी चाहिए या  कुछ खरीदना हो, सब कुछ एक टच में कर देता है, सुई से लेकर बडी चीज, सब आपके घर आ जाती है”
“कपडे हो,  गहने हो, रसोई का सामान…..।.”
बडी दादी ने बीच में टोकते हुए पूछा
“और. ……..  संस्कार?”

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