जून 2026

देशसत्य की अग्निपरीक्षा     Posted: June 1, 2020

“अरे भाई कौन हो तुम और शहर से दूर यहाँ जंगल में …इस झोपड़े में क्या कर रहे हो?  ” युधिष्ठिर ने वन में भ्रमण करते हुए एक झोपड़े के बाहर बैठे उदास ,लाचार से दिख रहे उस  व्यक्ति से पूछा।

 “मैं सत्य हूँ ,आज कल यहीं रहता हूँ । यही मेरा झोपड़ा है ।”

“आश्चर्य है तुम यहाँ हो ,..तुम्हें लोगों के दिलों में रहना चाहिए…। “

” वहाँ तो धर्मराज झूठ ने अपना स्थायी निवास बना लिया है और मुझे खोटे सिक्के की तरह बाहर निकाल फैंका है।”

” ओह ! यह तो बुरी खबर है तो तुम समाज में रह सकते हो ।”

“वहाँ सब मुझसे नफरत करते हैं । “

“इसकी कोई वजह होगी। “

“हाँ! वजह है मैं आईने की भांति लोगों को उनकी सही सूरत दिखाता हूँ। “

“तो उसमें हर्ज क्या है ?यह तो अच्छी बात है। “

“धर्मराज ! आज भ्रष्टाचार, चार सौ बीसी, रिश्वत खोरी आदि के इतने खतरनाक कॉस्मेटिक्स के लेप बाजार में आ गये हैं, जिनके प्रयोग से लोगों के चेहरे इतने भयावह हो गए हैं कि वे अपना चेहरा देखना पसंद नहीं करते । “

“तो कार्यालयों में चले जाओ वहाँ तो तुम्हारा होना बहुत आवश्यक है। “

“गया था धर्मराज …मगर एक ही पल में उठाकर कचरे के डिब्बे में फेंक दिया गया।”

“ओह !तब तो पक्का तुम्हें राजनीति में जाना चाहिए।”

” राजनीति …! तो अब देश में कहीं बची नहीं । कूटनीति का ही सर्वत्र साम्राज्य है। और कूटनीति को तो सदा ही से मुझसे परहेज रहा है।”

” बड़े आश्चर्य की बात है मैं तो सत्य की पताका लेकर ही स्वर्ग तक पहुंचा था।”

” आप भूल रहे हैं धर्मराज, वह द्वापर युग था आज कलयुग है।”

“तब तो पक्का तुम संचार विभाग (मीडिया) में चले जाओ वहाँ लोग तुम्हें सिर माथे बैठाएंगे । “

 ” वहाँ मेरे लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा है धर्मराज।”

“ऐसा क्यों भला…? “

“क्योंकि मैं उन्हें विज्ञापन शुल्क जो नहीं दे पाता। “

-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine