आज निम्मी ने लौकी की रसेदार सब्जी बनाई थी। उसे मालूम था कि इति को ये सब्जी बिल्कुल पंसद नहीं मगर रोज-रोज बर्गर और पिज्जा भी तो खाने को नहीं दे सकती थी।
“माँ, आज लौकी बना दी। आपको मालूम है न मुझे ये सब्जी नहीं पंसद। मुझे कुछ और खाना है।” इति मुँह बनाकर बोली।
“तुम्हें भी मालूम होगा कि घर में जो बना है, खाना वही पड़ेगा। रोज बर्गर-पिज्जा नहीं मिलेगा। ध्यान रखना थाली में एक दाना नहीं छूटना चाहिए।” निम्मी ने कड़क होकर कहा।
“माँ, पूर्वी की मम्मी रोज उसके टिफिन में ब्रेड पकौड़ा , फ्रेंच फ़्राई, बर्गर रखती है । एक आप है। मुझे खाना नहीं खाना।” इति थाली सरकाते हुए बोली।
“तो मत खाओ और जिस पूर्वी की बात कर रही हो न, उसको तो मैं कई बार देख चुकी हूँ। जरा-जरा देर में तो थक जाती है। कितना स्टेमिना है उसमें ? ऐसे ही बनना है तुम्हें तो कर दो पिज्जा का आर्डर।” निम्मी गुस्से में बोली।
इति का मुँह लटक गया। निम्मी थोड़ी देर उसे देखती रही फिर बीच का रास्ता निकालते हुए बोली, “चलो, दोनों की बात रखते है। तुम्हारा डाइट चार्ट बना लेते है,जैसा मेरा बना है। केवल संडे को डाइट-फ्री डे होगा। मंजूर है तो मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर प्रॉमिस करो।”
इति ने बड़ी- सी मुस्कान के साथ अपना हाथ निम्मी के हाथ के ऊपर रख दिया।
सेहत और स्वाद ने एक दूसरे से हाथ मिला लिया था।
-0-