जून 2026

चर्चा मेंसीधे सरल इंसान सुरेश शर्मा जी     Posted: May 1, 2015

सुरेश शर्मा जी बहुत ही सीधे सरल इंसान थे। छल-कपट, चालाकी से कोसों दूर। हँसमुख स्वभाव के शर्मा जी संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति का मन

माता शरबती देवी पुरस्कार के अवसर पर  पंचकूला में अक्तुबर 2010
माता शरबती देवी पुरस्कार के अवसर पर पंचकूला में अक्तुबर 2010
जीत लेते थे। उन्होंने जीवन में न जाने कितने कष्ट झेले होंगे, लेकिन उन्हें कभी भी अपना दुखड़ा रोते नहीं देखा। अपने कष्ट को भी हँसी में टाल जाते थे। किसी शारीरिक आपरेशन के बाद जब भी उनका हाल-चाल जानना चाहा, उन्होंने सदा ही हँस कर जवाब दिया, “अग्रवाल जी, पूरी तरह से ठीक हूँ, वह तो डॉक्टर फ्री बैठे थे ; सो चला गया, उनके बच्चे भी तो पालने हैं न।” या फिर कहते थे, “पुरानी गाड़ी है, रिपेयर कर के ही चलेगी।”
शर्मा जी के स्वभाव की चर्चा अक्सर घर में होती थी। साल 2007 में इंदौर में ‘लघुकथा सम्मेलन’ के आयोजन के अगली सवेर आयोजन स्थल पर शर्मा जी आए। हम लोग नाश्ता कर रहे थे। इंदौर में कचौरी-जलेबी का नाश्ता खूब चलता है। शर्मा जी के स्वास्थ्य को ध्यान में रख पत्नी (ललिता अग्रवाल) ने पूछ लिया , “भाई साहब, जलेबी लोगे?”
थके हुए सुरेश शर्मा जी ने हँसकर जवाब दिया, “ब्राह्मण को मीठे से क्या परहेज!”
शर्मा जी की मीठी बातें सदैव उनकी याद दिलाती रहेंगी।
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