जून 2026

देशसेकंड हैंड     Posted: April 1, 2024


सुबह-सुबह दयालजी को गुप्ताजी का फोन आया, “दयाल बाबू, शाम को होटल मौर्य में अपनी बेटी की शादी का फंक्शन रखा है. परिवार को लेकर आ जाना।” इतना कहते ही उधर फोन कटा इधर दयाल जी के माथे पर बल पड़ गए, ‘अब यह कौन-सी बेटी है? उनकी तो एक ही थी, जिसकी शादी बड़े शानो शौकत से चार साल पहले हुई थी।’ मन में तरह-तरह के सवाल लेकर दयालजी शाम को होटल मौर्य पहुँच गए। देखा, तैयारी बेहद औसत दर्जे की थी। अंदर बमुश्किल सौ लोग थे। एंबिएंस भी शादी के समारोह की तरह बिलकुल नहीं लग रहा था। एक छोटा-सा बेहद साधारण सजा हुआ स्टेज था। मगर हाँ,स्टेज पर खड़े वर-वधू एक दूसरे का हाथ मसलते-रगड़ते हुए बड़े प्रसन्न और उत्साहित दिख रहे थे। दयालजी ने अपने कदम तेजी से स्टेज की तरफ ले गए। ‘अरे ! यह तो गुप्ता की वही लड़की जिसकी, शादी चार साल पहले हुई थी। यानी पहली टूट गई, अब दूसरी हो रही है ?’ मगर जब दयालजी की नजर लड़के पर पड़ी, तो वे एक बार फिर से सनाका खा गए।
उन्हें याद आया, वे इस लड़के की शादी में भी शरीक हुए थे। तो क्या इसकी भी टूट गई और अब दूसरी हो रही है।।? इस तरह के सवालों ने दयालजी को अपने घेरे में ले लिया और वे अपना माथा खुजाने लगे। वे पुरानी यादों के गलियारों से होते हुए चार साल पीछे चले गए। उन्हें याद आया, गुप्ता जी का दामाद बेहद खूबसूरत था। ऊँचे ओहदे पर आसीन था। फिर रिश्ता टूट कैसे गया ? उन्हें यह भी स्मरण आया कि उस लड़के की दुल्हन भी नायाब सुंदरी थी। अच्छी पढ़ी-लिखी भी थी। फिर वहाँ भी दरार किस बात की पड़ गई..?
इन्हीं प्रश्नों का उत्तर तलाश करते-करते दयाल जी को यह भी ख्याल आया कि गुप्ता जी की लड़की और यह लड़का अपनी-अपनी शादी में बहुत खुश नजर नहीं आए थे। मगर अब माजरा यह था कि अपेक्षाकृत साधारण शादी के बावजूद आज दोनों बड़े प्रसन्न थे। दयालजी के पास दो पुरुष इस शादी के बारे में चर्चा कर रहे थे। दयालजी ने उन लोगों से पूछा, “यह इन दोनों की दूसरी शादी है, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं, जबकि पहली शादी में अच्छे पार्टनर के बावजूद वे इतने खुश नहीं दिखे थे ?” वे दोनों हँसने लगे। एक ने
ठहाका लगाते हुए कहा, “अब तो दोनों एक दूसरे से जीवन भर पसंद करेंगे ही! ” दयालजी ने हैरानी से पूछा, “क्यों..? अब ऐसा क्यों होगा..?’ इसपर दूसरे ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अकड़ टूट गई। अब दोनों सेकंडहैंड जो हो गए..!”
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