सीरियल समाप्त होते ही पत्नी ने टी.वी. ऑॅफ किया और रात के भोजन के बर्तन समेटती हुई बोली, ‘‘आज दीपू ने खूब पानी पी रखा है। जल्दी सोने की जिद कर रहा था तो मैंने दूध पी पिला दिया था। कहीं ऐसा न हो कि यह रात को सोते बिस्तर पर पेशाब ही कर दे, आप इसे उठाकर एक बार पेशाब करवा लें।’’
मैंने दीपू को जगाने के लिए आवाजें दीं, ‘‘दीपू ओ दीपू… उठियो बेटा….उठ!’’ वह कुनमुनाने लगा था। मैनें उसे तनिक जोर से हिलाते हुए पुन: आवाज लगाई, ‘‘दीपू…उठ खड़ा हो!’’
यह सुनते ही वह तुरन्त आँखें मलता हुआ बिस्तर पर ही खड़ा हो गया और अर्धनिद्रावस्था में ही बोलना शुरू हो गया, ‘‘टू वन्जा टू…. टू टूजा फोर…।’’
मैं हैरान। पत्नी आवाक् । मैं उसे थामे खड़ा था। उसे बार–बार पुकार रहा था, ‘‘बेटे दीपू! तू घर पर है…स्कूल में नहीं बेटा…..।’’ पत्नी भी बराबर उसे जगाने का प्रयास करती रही ;किन्तु वह टू टैन्जा ट्वेन्टी पर ही आकर रुका…..।
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