जून 2026

दस्तावेज़हरिशंकर परसाई से मुकेश शर्मा की बातचीत     Posted: August 1, 2019

प्रश्न: लघुकथा का साहित्य में क्या स्थान है?

उत्तर: लघुकथा कथात्मक अभिव्यक्ति का लघुत्तम रूप है?

प्रश्न: लघुकथा के प्रारम्भिक काल के विषय पर आपके विचार?

उत्तर: पंचतंत्र, हितोपदेश आदि में लघु बोधकथाएँ हैं। पश्चिम में ऑस्कर वाइल्ड की लघुकथाएँ हैं। इनका सबका मिला-जुला प्रभाव भारतीय लघुकथा पर है। हम अपनी लघुकथा को परम्परा से हितोपदेश, पंचतंत्र से जोड़ सकते हैं। पुराणों तथा दर्शन ग्रंथों के दृष्टांत बहुत हैं।

प्रश्न: इन दिनों लिखी जा रही लघुकथाओं की प्रमुख कमजोरियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: लघुकथाओं में चरम बिंदु (climax) का महत्त्व है। यह अन्त में आना चाहिए। काफी लघुकथाओं में यह नहीं आता या कमजोर आता है।

प्रश्न: लघुकथा का मिनी कहानी एवं व्यंग्य से क्या सम्बन्ध है?

उत्तर: लघुकथा को मिनी कहानी कह सकते हैं। लघुकथा में व्यंग्य प्रधान तत्त्व है।

प्रश्न: लघुकथा की वर्तमान स्थिति कैसी लगती है?

उत्तर: अच्छी है।

प्रश्न: आज इतनी अधिक लघुकथाएँ क्यों लिखी जा रही हैं?

उत्तर: कथन लघुत्तर होता जा रहा है और लघुकथा तीखा प्रभाव छोड़ती है। प्रभाव एक पिन चुभोने जैसा होता है।

प्रश्न: लघुकथा का प्रारूप कैसा होना चाहिए?

उत्तर: कम-से-कम शब्द होने चाहिए। विशेषण-क्रिया विशेषण नहीं हो और चरम बिन्दु तीखा होना चाहिए।

प्रश्न: लघुकथा का आकार कितना हो?

उत्तर: वस्तु के हिसाब से आकार तय होगा।

प्रश्न: लघुकथा लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें   ….?

उत्तर: क्या कहना, इसका ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न: आजकल लिख रहे लघुकथा लेखकों की स्थिति पर आपके विचार….

उत्तर: मैं इस पर कुछ नहीं कहूँगा। साधारणतः ठीक है।

प्रश्न: लघुकथा को प्रभावशली बनाने के लिए और कोई विशेष बात….?

उत्तर:लेखकों में सामाजिक चेतना हो। अन्तर्विरोध पकड़े। शैली सहज हो।

प्रश्न: स्वस्थ लघुकथा के क्या मापदण्ड हो सकते हैं?

उत्तर: छोटी, प्रभावशाली और विचार करने को बाध्य करने वाली लघुकथा हो

प्रश्न: पिछले दिनों चले लघुकथा आंदोलन पर आपके विचार…..? क्या किसी विधा की उन्नति के लिए आंदोलन जरूरी हैं?

उत्तर: आंदोलन के मुद्दे मेरी समझ में नहीं आते। कोई लघुकथा-आंदेालन है ही नहीं। जरूरत भी नहीं है।

प्रश्न: क्या किसी विधा की उन्नति के लिए समीक्षा आवश्यक है?

उत्तर: समीक्षा में अवश्य जानकारी होती है।

प्रश्न: इस विधा को समीक्षकों द्वारा गंभीरता से न लिए जाने के क्या कारण हैं?

उत्तर: समीक्षक आकृष्ट तो हो रहे हैं।

प्रश्न: लघुकथा की समीक्षा के क्या निकष हो सकते हैं?

उत्तर: जो निकष कहानी की समीक्षा का है, वही लघुकथा की समीक्षा का है।

प्रश्न: लघुकथा का समीक्षा पक्ष पुष्ट न हो पाने के क्या कारण है?

उत्तर: लघुकथाएँ समीक्षकों का ध्यान खींचने लायक शायद अभी नहीं हुई हैं।

प्रश्न: इसके समीक्षा पक्ष को पुष्ट करने के लिए लघुकथा लेखकों की क्या भूमिका हो सकती है?

उत्तर: लघुकथा-लेखक खुद समीक्षा भी लिखें।

प्रश्न: इसके बेहतर भविष्य के लिए कोई योजना?

उत्तर: मेरी नज़र में कोई योजना नहीं है।

प्रश्न: क्या आपको विधा का भविष्य  उज्ज्वल लगता है?

उत्तर: भविष्य जरूर उज्जवल है। फार्म हर विधा का छोटा होता जा रहा है।

प्रश्न: लघुकथा लेखकों के लिए कोई सुझाव या संदेश?

उत्तर: अनुभवों का विश्लेषण करें, नज़रिया हो, अनुभवों का सही अर्थ करें और कम-से-कम शब्दों में कह दें।

(सन्दर्भ: लघुकथा के आयाम: सम्पादक: मुकेश शर्मा)

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