जून 2026

देशख़ास आप सबके लिए!     Posted: November 1, 2015

गर्म-गर्म गुजिया एक सुंदर प्लेट में सजी हुई मेज़ पर रखी हुई थीं। वह अपने मोबाइल से भिन्न-भिन्न एंगल से उस गुजिया से सजी प्लेट का फ़ोटो खींच रही थी-मगर उसके मन का फ़ोटो नहीं आ रहा था। वह बहुत जल्दी में लग रही थी और इसलिए खीझ भी रही थी। मेज़ के दूसरे कोने में उसका लैपटॉप रखा हुआ था, जिसमें वह बीच-बीच में झाँक कर आती थी और उसकी बेचैनी और भी बढ़ जाती थी। मानों वह किसी ”रेस” में भाग ले रही हो। इतने में उसका बेटा चिंटू, खेलकर आया और इतनी सुंदर गुजिया देखकर उससे रहा न गया और ” अहा! गुजिया! मम्मा ! बहुत ज़ोरों की भूख लगी है!” कहकर प्लेट पर झपट पड़ा।
”चटाक् ”… की आवाज़ के साथ एक और आवाज़ गूँजी…
” दो मिनट का सब्र नहीं है! कोई मैनर्स नाम की चीज़ भी सीखी है? भुक्क्ड़ की तरह टूट पड़े बस!”
फिर सन्नाटा छा गया। चिंटू प्लेट तक पहुँच भी न पाया। उसे अपना क़सूर भी न समझ आया। बस अपना गाल सहलाता हुआ, सहम कर ठिठक गया।
वह बड़बड़ाती हुई फिर से गुजिया की प्लेट की फ़ोटो लेने लगी।
इतने में एक संकोचभरी आवाज़ आई,”बहू ! अगर तुम खाली हो गई हो तो गुजिया ले आना, भगवान को भोग लगा दें?”
“आती हूँ!… सबको अपनी ही पड़ी है! हुँह !”
कहती हुई वह लैपटॉप पर बैठकर कुछ करने लगी। थोड़ी ही देर में उस ”गुजिया की प्लेट” की फ़ोटो फ़ेसबुक पर लगी हुई थी , और उसका शीर्षक था- “ख़ास आप सबके लिए!”
उसपर ढेरों ”लाइक्स” और ”वाह! वाह! गृहिणी हो तो आप जैसी !” – कमेंट्स आने लगे और वह गर्व से फूली नहीं समाई!
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