पहले कुत्ते ने दूसरे कुत्ते की तरफ देख कर कहा,-“यार,इस तरह दूसरों की जंजीर में बँधकर अपना जीवन क्योँ बरबाद कर रहे हो?मेरी तरह आजाद रहो…कब तक अपनी वफादारी दूसरों के टुकड़ों पर बेचते रहोगे?”
दूसरा कुत्ता बोला-“पार्टनर, मैं तो अपने मालिक को छोड़ना चाह रहा हूँ, पर मालिक ही मुझे नहीं छोड़ता। कल कह रहा था,अब तुम ट्रैंड हो गए हो…याद है न तुम्हें, मैंने जिन लोगो की लिस्ट तुम्हें दी है,उन पर तुम्हें मुझसे पूछे बिना ही भौंकना है।”
पहला कुत्ता फिर बोला,” यानी कि तुम आदमी के इशारों पर जी रहे हो? भौंकना तो हमारा जातीय संस्कार है बॉस….लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि आदमी हमें सिखाए कि हमे किस पर भौंकना है।”
दूसरा कुत्ता संयत स्वर मे बोला,”सही कहते हो भाई…. जंजीर की विवशता वही समझ सकता है, जिसके गले मे जंजीर होती है। अपने मालिक की रोटी पर पलने पर भी मैं तुम पर भौंक नहीं रहा हूँ, यही क्या कम है।”
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महेश राजा
वसंत 51,कालेज रोड।महासमुंद।छत्तीसगढ़।।