दिसम्बर -2018

चर्चा में29वाँ लघुकथा सम्मेलन पटना में     Posted: December 1, 2017

अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के तत्वावधान में दो दिवसीय 29वाँ लघुकथा सम्मेलन 001-charcha-menआयोजित किया गया जिसमें उद्घाटनकर्ता के रूप में गोवा की महामाहिम वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मृदुला सिन्हा की स्नेहिल उपस्थित रही।

4 नवम्बर 2017, शाम पाँच बजे प्रेमचन्द रंगशाला,राजेन्द्र नगर, लघुकथाकारों का नियत समय पर एक के बाद एक लगातार आने से प्रांगण में रौनक बढ़ गयी थी। सम्मेलन की तैयारियों एवं  कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार पूर्वक विवेचना करते हुए प्रगतिशील लघुकथा मंच के महासचिव ध्रुव कुमार ने मंच के उपलब्धियों के साथ संघर्ष को सबके सामने रखते हुए, संतुलित वक्तव्य देते हुए मंच को सम्मोहक तरीके से बाँधें रखा। उन्होंने मंच की भविष्य की योजनाओं को भी सबके सामने रखा। महासचिव ध्रुव कुमार ने कहा -अब समय आ गया है कि लघुकथा सम्मेलन बिहार के बाहर देश के अन्य शहरों में आयोजित किया जाना चाहिए।

003-rajyapalराज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा के आते ही उपस्थित जनों द्वारा जन गण मन गाकर, दीप प्रज्वलित कर, सरस्वती वंदना गाकर  प्रेमचंद रंगशाला, राजेन्द्र नगर के सभागार में उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया गया। अतिथियों का स्वागत शाल, प्रतीक चिह्न एवं फलों की टोकरी देकर किया।

उद्घाटन-सत्र में लघुकथा पर अपना वक्तव्य देते हुए महामहिम राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा ने वेद-पुराणों सहित रामायण में निहित कथाओं को जन-मानस में जागृति लाने का आधार बताया। वे वर्तमान समय में लघुकथा विधा के प्रति रुचि को बढ़ावा देने हेतु विशेष कार्यशाला करने पर भी जोर दिया। संस्कार की रक्षा, आचरण के सहारे हो,  साहित्य के क्षेत्र में बच्चों में  विषय देकर लघुकथा लेखन के लिए कौतूहल  2-charcha menबढ़ाने का सुझाव दिया। वर्तमान में लघुकथा के प्रति  रुझान पर हर्ष भी प्रकट किया। राज्यपाल डॉ मृदुला सिन्हा ने कहा कि लघुकथा का अपना महत्त्व है। छोटी प्रभावी कहानियाँ याद रह जाती है। उनके पिता द्वारा सुनाई छोटी कहानियाँ आज भी याद है। पटना में साहित्य पर खूब चर्चा होती है। लघुकथा के विकास के लिए मंच इतने सालों से प्रयास कर रहा है, इसकी सराहना होनी चाहिए। इस मंच से लोगों को जुड़ना चाहिए। बच्चों को लघुकथाएँ  लिखने को प्रेरित करना चाहिए। सामाजिक विषयों पर अधिक से अधिक लघुकथा लिखने की जरूरत पर भी बल दिया।

वक्तव्य के तत्पश्चात्  सामा-चकेबा पर्व ( मिथिला में मनाया जाने वाला भाई-बहन का पर्व है) का नृत्य के 23795562_862556010588877_3863168740042325404_nमाध्यम से स्कूल की छात्राओं ने मंचन किया ,जिससे वातावरण में माधुर्य छा गया था।विलुप्त होते मुहावरों को आधार बनाकर नाटक विधा में डॉ. मृदुला सिन्हा की एक पुस्तक आई है। उन्हीं मुहावरों में से दो मुहावरों पर किलकारी समूह के बच्चों ने हास्यरस से सराबोर अपनी नाट्य प्रस्तुति दी, जिसने पूरे रंगशाला को आनन्ददायक पल बना दिया। प्रगतिशील लघुकथा मंच पटना के महासचिव ध्रुव कुमार के मंच संचालन में यह सत्र सफलताइपूर्वक सम्पन्न हुआ। दूसरे सत्र की शुरुआत प्रांगण में खीर खिलाने से की गई।

4-charcha-4 नवम्बर 2017 को प्रान्त के अलग-अलग हिस्सों सहित देशभर से आए लघुकथाकारों के साथ देव-दीपावली मनाते हुए डॉ. मृदुला सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर 501 दीपों की माला के बीच खुले में पूनम की छटा बिखेरती चाँदनी रात में सबके साथ अपनी लघुकथा का पाठ भी किया। समारोह की अध्यक्षता डॉ. सतीशराज पुष्करणा ने की। मंच के महासचिव ध्रुव कुमार सहित इंजी. गणेश जी बागी, अवधेश प्रीत, सिद्धेश्वर, डॉ. मालती महावर, कान्ता रॉय, अनिता राकेश, कल्याणी कुसुम सिंह, सुषमा सिन्हा, सरिता बघेला, सत्या शर्मा ‘कीर्ति’, पूनम आनंद, विभा रानी श्रीवास्तव, संजू सरण, बिन्देश्वर इत्यादि सहित किलकारी समूह के बच्चों ने भी अपनी-अपनी लघुकथाओं का पाठ किया।

5 नवम्बर 2017 लघुकथा सम्मेलन दूसरे दिन का सत्र भारतीय नृत्य कला मंदिर, फ्रेजर रोड, पटना में आयोजित हुआ। सुबह ठीक दस बजे से कार्यक्रम की शुरुआत हो गई थी। दीप प्रज्वलित करने के उपरांत फूलों की जगह फलों की टोकरी देकर अतिथियों का स्वागत किया गया।5-satyaआयोजन की शुरुआत पहले सत्र से हुई जिसका विषय ‘रचना और शिल्प’ था। वक्तव्य देने के लिए मंच पर वरिष्ठ लघुकथाकार मधुदीप गुप्ता, तारिक असलम तसनीम, कान्ता रॉय व संजू शरण को आमंत्रित किया गया जिसमें सबने मिलकर रचना शिल्प के विविध आयाम पर अपने अपने दृष्टिकोण से लघुकथाकारों का परिचय करवाया। सत्र की अध्यक्षता डॉ सतीशराज पुष्करणा ने की।  मंच का संचालन करते हुए सुश्री आभा रानी ने भी रचना-शिल्प पर विशिष्ट दृष्टिकोण के संदर्भ में तकनीक से परिचय कराया।

दूसरे सत्र में स्त्री-विमर्श और लघुकथा विषय में वक्तव्य के लिए मंचासीनों में प्रमुख अवधेश प्रीत,  सिद्धेश्वर, सरिता बघेला थे। अवधेश प्रीत जी ने विस्तारपूर्वक स्त्री- विमर्श पर लेखन की दशा और दिशा में अपनी बात रखी। उन्होंने वक्तव्य देने के लिए स्त्री-विमर्श पर लेखन को आधार बनाकर कर कई लघुकथाओं का पाठ और उसकी गहन समीक्षा की जो नवलेखन को स्त्री -विमर्श पर विषय चयन के प्रति सचेत होने को कहा। सिद्धेश्वर ने पुरुष-विमर्श पर अपने कई नवीन प्रश्न रखे। इस सत्र में  मंच की अध्यक्षता डॉ मालती महावर बसंत ने की। सत्र का मंच संचालन करते हुए वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज ने भी वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक में स्त्री की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

तीसरे सत्र के विषयानुसार लघुकथा वर्तमान और भविष्य  को केन्द्र में रखकर वक्तव्य देने हेतु मंच पर अनिता राकेश, कल्याणी कुसुम सिंह, सुषमा सिन्हा, डॉ. अशोक कुमार प्रसाद और कल्पना भट्ट को आमंत्रित किया गया। अनिता राकेश ने वर्तमान समय के लेखन में संचेतना को लेकर उत्साहित होते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए आश्वस्त होने की बात कही। उन्होंने लघुकथा के विकास संदर्भ में भी विविधता से विचार प्रकट किया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए मधुदीप गुप्ता ने कहा कि लघुकथा आज की जरूरत है। लोगों के पास समय का अभाव है। आज लोग मोटा व पाँच सौ पृष्ठ का उपन्यास नहीं पढ़ना चाहते। उनके पास उतना धैर्य भी नहीं है। वे कम समय में ऐसी चीज पढ़ना चाहते हैं जो उन्हें झकझोर दें ,वह विशेषता लघुकथा के पास है।

सम्मान समारोह व समापन सत्र गोवा की राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा के हाथों हुआ।सुश्री ममता मेहरोत्रा की तीन पुस्तकों, सुश्री सुषमा सिन्हा की एक पुस्तक का लोकार्पण किया गया। सभागार में बैठे सभी लघुकथाकारों को सम्बोधित करने से पूर्व उन्होंने लघुकथा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु डॉ. मालती महावर बसंत,  सुषमा सिन्हा, डॉ. मेहता नागेन्द्र, डॉ. अनीता राकेश, विभा रानी श्रीवास्तव, कल्पना भट्ट, ए. आर. हाशी तथा अंकुर सम्मान किलकारी समूह की सरिता कुमारी, रानी कुमारी, नाट्य निर्देशन में रितु जायसवाल, मुखिया सिंहवाहिनी पंचायत, अचला चौधरी, निर्देशक, सामा-चकेबा, रवि भूषण उर्फ मुकूल, रंगमंच, संजय कुमार अग्रवाल को सम्मानित किया।

प्रस्तुति- कान्ता रॉय, भोपाल

 

 

 

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine