दिसम्बर -2018

देशरोटी की महक .. सुरेश बरनवाल     Posted: August 1, 2018

 गरीब सत्तू के घर पर आज मेहमान आए थे। मेहमान मध्यमवर्ग के लोग थे और सत्तू के घर पर आकर अपनी अच्छी आर्थिक स्थिति पर मन ही मन गर्वोन्वित हो रहे थे। सत्तू उस समय घर से बाहर मजदूरी पर गया हुआ था। सत्तू की पत्नी ने अपनी हैसियत से अपने मेहमानों की सेवा की थी। शाम को थका हारा सत्तू घर आया तो मेहमानों से दुआ सलाम के बाद उसने अपने पसीने से भीगे मैले कपड़े उतारकर पत्नी को साफ करने के लिए दिए और नहाने चला गया। पत्नी जब कपड़े साफ करने बैठी तो मेहमान स्त्री ने पास आकर नाक भौं सिकोड़कर कहा, ‘इस कपड़े से पसीने की कितनी बदबू आ रही है। तुम कैसे यह कपड़ा हाथ में ले पा रही हो?’

सत्तू की पत्नी ने सहज भाव से कपड़े को नाक के पास ले जाकर  सूँघा और बोली,’इसमें पसीने की बदबू तो नहीं आ रही, हाँ, रोटी की महक जरूर आ रही है।’

मेहमान स्त्री कुछ न समझ पाने की स्थिति में आँख मिचमिचाती रही।

-०- सुरेश बरनवाल,सिरसा, हरियाणा-9896561712

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