तुम फिर यह कँटीले पौधे ले आई तनु ….हजार दफा कहा है… अपने यहाँ यह काँटे नहीं लाते।”
” लेकिन क्यों माँ…? वजह तो बताइए…!’’
” बस कहा ना…. नहीं मतलब नहीं…!”
” क्यों माँ से आरग्यू करती हो तनु…? अमर भुनभुनाया ..
अरे पर कारण तो….
” कोई कारण नहीं…. बस यही चला आ रहा है…!”
” पर देखिए ना माँ ..! कितना सुंदर है। आप कारण तो बताइए। पिछली बार भी अपने नींबू उखड़वा दिया था।”
“हाँ…. उसमें भी काँटे होते हैं ना..
” पर यही कँटीले पेड़ के नींबू के बगैर आपके लाड़ले को खाना नहीं भाता।”
” जो भी हो… माँ की ज़िद थी। ये पौधे नहीं लगेंगे।
” माँ देखिए तो…. काँटों के बीच उसके सिरे पर खिला ये गुलाबी फूल ….! कैसा जीवटता का संदेश देता है। और अमर बताते हैं कि पापा तो उनके बचपन में ही चले गए थे। आपने अपने जीवन में क्या कम काँटे देखे हैं…! अमर ने मुझे सब बताया है।और माँ .. यह काँटों के बीच सिर उठाए खड़ा गुलाबी फूल मुझे आपकी ही याद दिलाता है। यह कभी भी नहीं मुरझाता।प्लीज माँ…!
तनु ने अपनी सास को ऐसी नजर से देखा कि उन्हें कैक्टस के सारे काँटों की जगह बूँदें नजर आने लगी थीं। और अब सबसे ऊपर खिला गुलाबी फूल भी मुस्कुरा रहा था।
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” लेकिन क्यों माँ…? वजह तो बताइए…!’’
” बस कहा ना…. नहीं मतलब नहीं…!”
” क्यों माँ से आरग्यू करती हो तनु…? अमर भुनभुनाया ..
अरे पर कारण तो….
” कोई कारण नहीं…. बस यही चला आ रहा है…!”
” पर देखिए ना माँ ..! कितना सुंदर है। आप कारण तो बताइए। पिछली बार भी अपने नींबू उखड़वा दिया था।”
“हाँ…. उसमें भी काँटे होते हैं ना..
” पर यही कँटीले पेड़ के नींबू के बगैर आपके लाड़ले को खाना नहीं भाता।”
” जो भी हो… माँ की ज़िद थी। ये पौधे नहीं लगेंगे।
” माँ देखिए तो…. काँटों के बीच उसके सिरे पर खिला ये गुलाबी फूल ….! कैसा जीवटता का संदेश देता है। और अमर बताते हैं कि पापा तो उनके बचपन में ही चले गए थे। आपने अपने जीवन में क्या कम काँटे देखे हैं…! अमर ने मुझे सब बताया है।और माँ .. यह काँटों के बीच सिर उठाए खड़ा गुलाबी फूल मुझे आपकी ही याद दिलाता है। यह कभी भी नहीं मुरझाता।प्लीज माँ…!
तनु ने अपनी सास को ऐसी नजर से देखा कि उन्हें कैक्टस के सारे काँटों की जगह बूँदें नजर आने लगी थीं। और अब सबसे ऊपर खिला गुलाबी फूल भी मुस्कुरा रहा था।
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