दसवाँ पुरस्कार

वाहन इतनी तेजी से चल रहे थे कि सड़क पार करना बहुत ही कठिन काम लग रहा था फिर एैसे में कोई अंधा व्यक्ति ……। मुझसे नहीं रहा गया सो भागकर उनके पास पहुँच गया था मैं और उनका हाथ पकड़कर बोला था, ’चलिए । ’
’अंधा हूँ बेटा, कुछ दिखाई नहीं देता । तुम मिल गए सड़क पार करवा रहे हो भगवान आपका भला करें …. । ’ फिर कुछ देर रूककर वह अंधा व्यक्ति बोला था, ’ क्या नाम है आपका ।’
’एम पी सिंह जाटव ।’ अब हम बीचांेबीच सड़क पर थे । उस अंधे व्यक्ति ने मेरा हाथ झटक दिया था और बहुत ही बेरूखी से बोला था, ’मैं रास्ता पार कर लूंगा ।’ और अपने गले में पड.े भगवान राम के पैंडल को चूमते हुए ’…. राम राम … शिव …शिव……हे राम …हे राम ’ जपने लगा था ।
मुझसे रहा नहीं गया सो बिलबिलाया था , ’ अंधे हैं आप …………. सड़क पार नहीं कर सकते…. रास्ता नहीं दिखाई देता है आपको लेकिन ……. लेकिन जाति …… जाति दिखाई देती है। ’
उस अंधे व्यक्ति ने मेरी एक न सुनी थी । वह अब भी सड़क के बीचोंबीच खड़ा ‘ हे राम …हे राम ’ जप रहा था ।