
मनोहर हर दिन की तरह सुबह-सुबह अपने ठेले पर सब्जियाँ लेकर कॉलोनी में पहुंचा। एक बड़े से बंगले के सामने रुका, तो अंदर से एक महिला निकली। उसने नाक-भौं सिकोड़ते हुए कहा, ‘अरे मनोहर! तुम्हारे ठेले से कितनी बदबू आ रही है। कभी साफ-सफाई भी कर लिया करो।’ मनोहर ने विनम्रता से कहा, ‘माफ कीजिए मैडम, कल रात बारिश में भीग गया था ठेला। अभी सुखा नहीं है पूरी तरह।’ तभी पास की झोंपड़ी से एक बुढ़िया निकली। वह धीरे-धीरे चलते हुए ठेले के पास आई और मुस्कुराते हुए बोली, ‘बेटा मनोहर, आज तो तेरे ठेले से बहार आ रही है। ऐसी खुशबू तो कभी नहीं आई। क्या बात है?’ मनोहर ने मुस्कुराकर जवाब दिया, ‘माँजी, आज सुबह-सुबह खेत से ताजी सब्जियाँ लाया हूं। शायद इसलिए ऐसी महक आ रही है।’ बंगले वाली महिला आश्चर्य से दोनों को देखती रही। उसे समझ नहीं आया कि एक ही ठेले से किसी को बदबू और किसी को खुशबू कैसे आ सकती है।
-0-पता-गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। 343025