जून 2026

देशसबसे बड़ी कमाई     Posted: January 1, 2025

रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए, पर वचन न जाई…मानस की चौपाइयाँ गुनगुनाते हुए, अपनी मस्ती में संतोष साइकिल से जा रहा था। सुबह की लाली वातावरण में रस घोल रही थी। तभी सरसराती हुई एक कार उसके पास से निकली। कार के अंदर बैठे एक व्यक्ति ने हाथ देकर संतोष को रोका। संतोष ने अपनी साइकिल रोकी। कार भी उसके सामने रूकी। गेट खोल कर उसके अंदर से एक सूटिक-बूटिक आदमी निकला। अपना काला चश्मा उतार, हैरत से संतोष की ओर देखते हुए बोला-ओह! मित्र संतोष क्या हाल है भाई!

   ‘‘ठीक है तुम बताओ विनय बाबू।’’

   ‘‘देख ही रहे हो। अरे! भाई कोई सरकारी-वरकारी नौकरी मिली या अभी तक वहीं प्राइवेट स्कूल में खप रहे हो।’’

     ‘‘मित्र गरीबी, घर-परिवार की जिम्मेदारियाँ और जीवन की तमाम आती-जाती समस्याओं के कारण तैयारी करने का मौका न मिला। इसलिए सरकारी नौकरी में न आ सका।’’

    ‘‘तुझसे मैंने कई साल पहले कहा था, मेरे साथ चल। अरे! मुझे देख मैं कौन सी सरकारी नौकरी कर रहा हूँ। कान्ट्रैक्टर हूँ, इसी ठेकेदारी के दम पर आज मेरे पास बढ़िया घर है,’’ अपनी गाड़ी पर हाथ रखते हुए, ‘‘महंगी गाडियाँ हैं। तेरे पास क्या है? आज तू मेरे साथ होता, तो मेरी तरह तू भी लाखों का मालिक होता; पर तुझे तो समाज सेवा का भूत चढ़ा था। प्राइवेट मास्टरी की सनक जो सवार थी। चार-पाँच हजार की नौकरी में क्या बना पाएगा, कुछ नहीं? क्या है तेरे पास बता.. बता…?’’

संतोष शर्म से अपना सिर झुका लिया, तभी उधर से छोटे-छोटे बच्चों की टोली निकली। ‘गुरु जी नमस्ते!-गुरु जी नमस्ते!’ के समवेत स्वर हवा में गूँजने लगे। कुछ बच्चे संतोष के पैर भी छूने लगे। विनय बाबू उजबक- से खड़े देख रहे थे।

   ‘‘चलें गुरु जी, आप को स्कूल की देरी हो रही होगी,’’ एक बच्चे ने पैर छूते हुए संतोष से कहा, तो उसकी तंद्रा भंग हुई। वह साइकिल पर बैठा, स्कूल जाते, बच्चों को एकबारगी देखते हुए अपना चेहरा विनय बाबू के सामने लाकर दृढ़ता से बोला-‘‘मेरी सबसे बड़ी कमाई यही है।’’ पैडल मारते हुए वह आगे बढ़ गया। अब गर्व से उसकी गर्दन तनी थी। विनय बाबू हतप्रभ खड़े, उसे हैरानी से जाता देख रहे थे। मानो नकली सोने की कलई सुनार ने उतार फेंकी हो।

 -0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine