
मनोरमा को बेडरूम में पहुँचने में कुछ ज़्यादा ही देर हो गई। मेहमानों के जाने के बाद रसोई और डाइनिंग टेबल की साफ़ सफ़ाई में काफ़ी वक़्त लग गया। सबसे कठिन काम तो नान वेज के बर्तनों को धोने माँजने का था। खुद वह वेज थी लेकिन पति व मेहमानों के लिए नान वेज पकाना पड़ा। और आज तो शराब की बोतल और गिलास भी सँभालने पड़े। पति मनोहर का कहना था कि डिनर के साथ वाइन का अब फैशन है। उसके बास ने पहले ही इस बारे में इशारा कर दिया था। मनोरमा ने सोचा था कि मेहमानों के विदा होने के बाद मनोहर रसोई सँभालने में मदद कर देगा तो वह जल्दी फ्री हो जाएगी। मगर वो अपनी वफादारी दिखाने के लिए बास को छोड़ने उनके साथ ही चला गया।
वहाँ से लौटकर मनोहर किचन की तरफ़ आने की बजाय ड्राइंगरूम में सोफे पर लेट कर टीवी पर क्रिकेट मैच देखने लगा। उसने दो-एक बार आवाज भी दी पर बास के ख़ुश होने की मस्ती और क्रिकेट के शोर की वजह से उसने सुना नहीं।
काम निपटाकर गाउन से हाथ पोंछती हुई मनोरमा बेडरूम में आई< तो मनोहर पहले से बेड पर लेटा हुआ था। मनोरमा अभी लेटी ही थी कि मनोहर ने उसे अपनी ओर खींच लिया; लेकिन फौरन झटके से पीछे हटते हुए बोला-मन्नू , नहाकर कपड़े तो चेंज कर लेती, बदन से मसालों की बू आ रही है। सुबह से खाने की तैयारी से थकी- हारी मनोरमा को जैसे करेंट छू गया। तुनककर बोली- डिनर करते वक्त तो खाने की खूब तारीफ़ हो रही थी। अब बू आ रही है? तुम लोगों को तो बस पत्नी के रूप में दिन में दासी और रात के अप्सरा चाहिए।
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