आभासी साम्राज्य का दरबार सजा था। महारानी तकनीक पूरे शानो-शौकत के साथ सिंहासन पर आरूढ़ थीं। संपूर्ण प्राणी जगत पर राज करने वाला दोपाया मनुष्य, जिंदगी से बेखबर महारानी की शरण में पड़ा हुआ था। मनुष्य के एक ओर नजदीक ही दुबली-पतली कुपोषित सी सुबुद्धि बैठने की कोशिश में थी। वहीं दूसरी ओर दुर्बुद्धि पसरी पड़ी थी।
कृत्रिम बुद्धि महामंत्री के पद पर सुशोभित थी। जिंदगी,फरियाद की सुनवाई की उम्मीद में दरबार के बाहर बेचैनी से चक्कर लगा रही थी।
महारानी ने महामंत्री को सतर्क मोड के लिए निर्देश देकर कार्रवाई आरंभ करने का संकेत किया। इशारा पाते ही कारकून ने दरबार हॉल से बाहर आकर आवाज लगाई। अगले ही पल जिंदगी फरियाद लिए हाजिर थी।
महारानी ने जिंदगी को बोलने की अनुमति देते हुए कहा, “बताओ क्या फरियाद है तुम्हारी? जिंदगी ने एक नजर मनुष्य पर डाली और बोली “पिछले कई दिनों से जैसे-तैसे समय कट रहा था कि अचानक प्रकट हुए दो दुष्टों ने जीना दूभर कर दिया है। ”
“कौन हैं वे?” महारानी ने प्रश्न किया। ज़िंदगी के उपलब्ध अपडेट डेटा और दोनों के ध्वनि संकेतों को विश्लेषित कर कृत्रिम बुद्धि ने जिंदगी के जवाब देने के पहले ही महारानी को बतला दिया “फेक और डीपफेक।”
“जी महारानी जी, हालात इस कदर बिगड़ गये हैं कि असली पर नकली होने का शक होने लगा है। ये दोनों दुर्बुद्धि के मानस पुत्र हैं और ……. कहते-कहते जिंदगी चुप हो गई।
महारानी ने प्रश्नवाचक मुद्रा में जिंदगी को देखा। जिंदगी ने तिरछी निगाह से कृत्रिम बुद्धि को देखते हुए महारानी के सामने सर झुका दिया। महारानी तकनीक ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए अभय मुद्रा से जिंदगी को आश्वस्त किया।
“कहो रूक क्यों गईं?”
जिंदगी ने न्याय की अपेक्षा में फिर मुँह खोला, “जी महारानी! दुर्बुद्धि के दोनों मानस पुत्र फेक और डीपफेक यह कहते फिरते हैं कि इन्हें महामंत्री का संरक्षण प्राप्त है। ” सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया।
“तुम्हारा मतलब है, कृत्रिम बुद्धि?” महारानी ने प्रतिप्रश्न किया
जिंदगी ने स्वीकारोक्ति में कातर निगाहों से महारानी को देखा। दरबार में मौजूद कृत्रिम बुद्धि, भावनाओं से नितान्त अपरिचित थी लिहाजा उस तक जिंदगी का जवाब नहीं पहुँचा फलस्वरूप कृत्रिम बुद्धि ने प्रतिक्रिया नहीं दी।
तकनीक ने तर्क बुद्धि की सलाह पर निष्पक्षता दिखलाते हुए ध्वनि संकेतों के माध्यम से महामंत्री कृत्रिम बुद्धि को आरोपों से अवगत करवाया।
कृत्रिम बुद्धि ने विश्लेषणात्मक प्रतिक्रिया दी “आरोप सरासर ग़लत हैं। मैं स्वयं कुछ भी नहीं। हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश, अच्छा-बुरा, असली-नकली, फेक-डीपफेक, दुर्बुद्धि-सद्बुद्धि, ये सभी शब्द, क्रिया और प्रतिक्रिया मात्र हैं। मुझ तक जो पहुँचता है, जो चाहता है, वही प्रतिफल में पाता है।“
महारानी ने जिंदगी की और देखा। वह नजरें झुकाए खड़ी थी। महारानी तकनीक ने तर्क बुद्धि से सलाह मशविरा करने के लिए कार्रवाई को कुछ देर के लिए मुल्तवी किया।
कुछ देर बाद दरबार जुटने पर कार्रवाई फिर आरंभ हुई। निर्णय सुनाए जाने के पूर्व ही जिंदगी फिर हताश महसूस कर रही थी। फैसले में एक बार फिर दोपाया मनुष्य ही दोषी पाया गया। फैसला सुनकर सुबुद्धि ने मनुष्य को चेतना में लाने की कोशिश की किंतु नाकाम रही। दरबार बर्खास्त हो रहा था। जिंदगी निढाल कदमों से बाहर निकल रही थी। मनुष्य को थामे दुर्बुद्धि कुटिलता से मुस्कुरा रही थी और सद्बुद्धि मनुष्य का साथ छोड़कर जा रही थी।
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