एक भीड़ दो चोरों की पिटाई कर रही थी। कई लोगों को हाथ सेंकने का मौका मिल रहा था। पहला दुर्बल चोर रिरिया रहा था, “भ…..इ……या……… गलती हो गई, माफ कर दो…….।’’
दूसरा सबल चोर पिटता जा रहा था; परन्तु पीटने वालों की ओर घूरती नजर से देख रहा था कि बेटा पीट लो, कभी मेरा वक्त आया तो…।
धीरे सबल चोर के बलिष्ठ शरीर, घूरती नजर का प्रभाव पड़ा। दूसरे चोर को छोड़, सारी भीड़ पहले कमजोर चोर की पिटाई में जुट गई।
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