
एक मॉर्डन स्त्री बैंक में क्रेडिट कार्ड इशू कराने के लिए केवाईसी कराने आई। वह अपने इत्र की महक से, धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने से सभी को प्रभावित कर रही थी। उसके लिए बहुत देर से खिड़कियों पर जमे पुरुषों ने अपनी जगह छोड़ दी थी। वहीं साधारण-सी वेशभूषा में एक बुजुर्ग महिला बहुत देर से पैसे निकालने वाले फार्म को लेकर रुआँसी – सी इधर उधर घूम रही थी। वह जिसके पास भी जाती, वह उसकी तरफ से निरपेक्षता से मुँह मोड़ लेता।
तभी बैंक में एक नई लड़की आई । बुजुर्ग महिला की आँखें आशा से चमक उठीं। वह अपना फॉर्म लेकर उसकी ओर बढ़ गई । लड़की भली थी। उसने सहर्ष फार्म भरकर उसको पेन देते हुए उस पर हस्ताक्षर करने को कहा। यह सब देखती, वह मॉर्डन स्त्री उपहास से हँसी और बोली – “अरे, इनको पेन की नहीं, इंक पैड की आवश्यकता है। अँगूठा लगाने के लिए।”
बुजुर्ग महिला ने मुस्कराकर उसकी ओर देखा और पेन लेकर हिंदी में हस्ताक्षर करते हुए कहा – “किसी की साधारण वेषभूषा और उसका गिटर- पिटर इंग्लिश ना बोलना उसके अनपढ़ होने का प्रमाण नहीं। चश्मा घर छूट गया था मेरा; इसलिए फार्म भरने में दिक्कत आ रही थी। रही हस्ताक्षर की बात तो वह तो मैं आँख बंद करके भी कर सकती हूँ। मगर एक बात मैं आपसे कहना चाहती हूं, अंगूठों ने ही पेन थामे हुए हैं।आप अँगूठे को अंडर एस्टीमेट मत कीजिए।”
तभी खिड़की काउंटर के पीछे से उस मॉर्डन स्त्री के लिए आवाज़ आई – “मैडम, मशीन पर अँगूठा लगाइए।”
उस स्त्री ने हड़बड़ाकर पहले खिड़की फिर उस महिला की ओर देखा।
अँगूठे से ‘ ऑल द बेस्ट’ का इशारा करती हुई जो मुस्कराती हुई, अपनी खिड़की की तरफ़ चली जा रही थी।
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