“क्या हुआ लिली ? उदास क्यों हो ?”

“क्या बताऊँ लतिका ? न्यूयॉर्क के जिस कंपनी में मैंने आवेदन किया था, वहाँ से अभी तक कोई रिप्लाई नहीं आया।”
“बस, इतनी सी बात लिली। आ जाएगा ई-मेल, वैसे भी तुम अपने शहर में हो, यहाँ तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है।”
“यही तो दिक्कत है लतिका, मैं बचपन से यहीं हूँ। पढ़ाई-लिखाई यही से हुई और अब नौकरी भी यहीं कर रही हूँ। परिवार वाले भी इसी शहर में, वही रास्तें, वही घर और वही लोग। उफ्फ्फ…मैं तंग आ गई हूँ इस घोंसलेनुमा शहर में रहकर। अब मैं उड़ना चाहती हूँ और तुम्हारी तरह देखना चाहती हूँ, यह संसार, जैसे तुम आई हो भारत से यहाँ अमेरिका। कुछ समझी?”
यह सुन उदास होते हुए लतिका बोली- “पहले मैं भी तुम्हारी तरह सोचती थी और फिर चली आई अपना शहर छोड़कर यहाँ, इस देश में; लेकिन अब मैं मिलना चाहती हूँ अपने लोगों से और एक बार फिर से चलना चाहती हूँ उन पुरानी राहों पर, जहाँ मेरा बचपना बीता। मैं एक बार फिर से लौट जाना चाहती हूँ अपने घोंसलेनुमा शहर में।”
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