वह दोनों शक्ल और काया से एक हैं । लोग उन्हें दो नहीं एक मानते आ रहे हैं । वर्षो तक दोनों ही अंग्रेज मालिक के मातहत रह चुके हैं, लेकिन अब उन में परस्पर बहुत फर्क आ गया है । पहला गरीब ही बना रह गया जबकि दूसरा अमीरी की सीढियाँ चढ़ता चला गया ।
आज सरकारी अस्पताल में पहला अपने भयंकर पेट -दर्द की दूरबीन से जांच कराने आया तो उसे एक सप्ताह आगे का नंबर मिला। तब तक उसे यह दर्द झेलना ही पड़ेगा । दूसरे ने बीमा कंपनी से वार्षिक हेल्थ चेकअप का प्लान ले रखा है । जरूरत पड़ने पर सुविधाओं वाले प्राइवेट अस्पताल में उसका चेकअप होगा । शाम को
दोनों रेलवे स्टेशन मिल गए और बातचीत चल पड़ी।
पहले ने कहा- “सोने का दाम आसमान छू रहा है, चाँदी भी हमारी पहुँच से दूर हो गई है।”
“दाम बढ़ने से क्या गहनों की बिक्री कम हुई ? शहर में ज्वैलरी के नए-नए शोरूम खुलते जा रहे हैं। ये सब कैसे चल रहे हैं ?”
दूसरे की बात से पहला अवाक रह गया । फिर कुछ देर में बोला- “डीजल महंगा होने से किसान मुश्किल में है । ट्रैक्टर और पंप डीजल से ही तो चलते हैं।”
दूसरे ने मुस्करा कर उत्तर दिया- “दाम बढ़ने से क्या डीजल की खपत कम हुई ? गाड़ियों की सेल बढ़ रही है । सभी शोरूम में गाड़ियों की वेटिंग चल रही है।’
अब पहला परेशान होकर बोला- “मुझे नौकरी चाहिए जैसे तैसे मजदूरी से काम चला रहा हूं, बच्चों का भविष्य अँधेरे में है ।”
बोतल से मिनरल वाटर पीते हुए दूसरे ने सुझाव दिया, “तुमने सुना नहीं है ? मंत्री जी ने क्या कहा है ? हमें नौकरी करने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनना है।’
पहला झल्ला कर बोला, “ज्यादा ज्ञान मत दो, हम जहां जाते हैं वही लंबी लाइन लगी मिलती हैं । अस्पताल हो, ट्रेन हो या खाद की दुकान । सब जगह धक्के खाने पड़ते हैं।’
दूसरा कुछ याद करते हुए बोला- “हाँ भीड़ तो बहुत हो जाती है । कोल्ड प्ले कंसर्ट में दस हजार का
टिकट लेकर भी हमें अच्छी सीट नहीं मिली और आईफोन- 17 के लिए तो रात से ही लाइन में खड़ा होना पड़ा था ।”
यह कहकर वह वन्दे भारत ट्रेन में प्रवेश कर गया और पहला रोआँसा होकर नल का पानी पीने लगा । उसकी लेट लतीफ पैसेंजर ट्रेन न जाने कब आएगी………….?