“किस सोच में डूबे हैं?”- सुबह से उदास बैठे पति को देखकर उनसे रहा न गया।
“….”
चलिए .., मैं आपके बालों में हेयर कलर लगा दूँ, देखो तो यहाँ कानों के पास, माथे के ऊपर कितनी सफेदी दिखने लगी है।” पति की चुप्पी उन्हें बेचैन कर रही थी।
“….”
“मैंने आपसे कितनी बार कहा है, मुझे सफेद बाल बिल्कुल पसंद नहीं है।” – पति का ध्यान दूसरी ओर करने की कोशिश करते हुए वे बोले जा रही थी।
“अरे भई, अब तो साठ साल का हो गया हूँ।”
“हाँ,तो?”
“तो अब सफेदी बालों से कब तक छुपाएँगे। हम बूढ़े हो गए हैं, हकीकत को मान लो, अब तो सरकार ने भी हमें रिटायर करके इस पर मुहर लगा दी है।”- कहते हुए उनकी आवाज भर्रा गई, वे चाहकर भी वे अपनी उदासी छुपा न पाए।
“देखिए जी, आप मुझसे, ऐसी बातें न करो और,रिटायर सरकारी नौकरी से हुए हैं, मेरी जिम्मेदारी से नहीं।”
” मैं कुछ समझा नहीं?”
” याद है? आपने, शादी के बाद मुझे कुछ माँगने के लिए कहा था, ….”
“हाँ, और तुमने सही समय आने पर माँगने को कहा था।”- सोचकर उनके उदास चेहरे पर मुस्कान तैर गई।
“ऐजी!आज मुझे आपसे कुछ चाहिए है।”
“हाँ! बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ?”- उन्होंने पत्नी की आखों में झाँकते हुए कहा।
“वादा कीजिए, आप हमेशा उसी जोश और उत्साह से रहेगें, जैसे अब तक रहते आए हैं।”- उन्होंने पति का हाथ पकड़कर भावुक होकर कहा।
“अब तक आप परिवार और बच्चों के लिए जीते आए हैं। अब हमारे अपने लिए जीने की बारी है।”
पत्नी की बात सुनकर गृहस्थी चलाने और बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में बीती, संघर्ष भरी जिंदगी उनकी आँखों के सामने तैर गई।
कुछ देर ऐसे ही सोचते रहने के बाद, “तो चलें हम सैर पर,अपने हिस्से की जिंदगी जीने की शुरुआत करने।”- उदासी की चादर फेंक पत्नी का हाथ कसकर थामकर पूरे जोश के साथ कहा।
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