गढ़वाली-अनुवादः डॉ. कविता भट्ट
मौत कुआँ पेट……
कलाकार, मोटर सैकिला करतब दिखौणू छौ,…
एक छुटा बच्च न, वे ऐंच एक रूप्या नोट उच्छाळी दे। कुआँ जाळ कु बण्यूं छौ यांका कारण नोट कुआं से भैर, नीस पौंछि गै।
कलाकार जब शो खतम होणा बाद भैर आई, त वे बच्चा न, अपणि छुटि छुटि हथियों म एक दूसरू नोट थामि क बोलि -“अंकल ! अंकल, आपकु रुप्या !”
“बसऽऽ ! बस एक रुप्या!” कलाकार न मुल मुल हैंसी कि बच्चा मूँ बोलि।
अब, बच्चा न, अपड़ा किस्सा म धारीं टॉफी निकाळी क बोलि-“अंकल, मि मूँ हौर पैसा नि छन!”
यां से पैलि कि कलाकार कुछ बोलदु, वु बच्चा अपणा दाँतुन टॉफी तोडिक आधी कलाकारै की तरफां बढौणू छौ।
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