निर्मल बाबू रोज-रोज असंभव होते जा रहे उन नेताओं में से थे, जिनकी दुर्लभ प्रजाति लुप्त होने के कगार पर थी। दूसरे नेताओं के भ्रष्टाचार और घोटालों के किस्से उन्हें बेचैन कर देते थे। वे अक्सर कहते थे, ‘‘देख लेना जनता और देश के साथ विश्वासघात करने वालों को राष्ट् के भावी नागरिकों के सामने कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा। हाँ,उन्हें अपने ही बच्चों के सामने अपनी काली करतूतों के लिए जवाबदेह होना पड़ेगा।’’
निर्मल बाबू राजनीति से संन्यास ले चुके थे,सचमुच ही उन्हें जवाबदेह होना पड़ा था। बेटे ने झुँझला कर उनसे पूछा था, ‘‘जिस समय दूसरे नेता देश के खजाने से अपनी जेबों को भर रहे थे,आखिर आप कर क्या रहे थे?’’ तो लज्जित से निर्मल बाबू से कोई जवाब देते नहीं बना था। वे कटघरे में थे।
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