जून 2026

संचयनचुन्नी     Posted: July 1, 2015

””नहीं नहीं, मैं नहीं पहना सकता अपनी बहू को सफेद चुन्नी। मैं कैसे कहूँ अपनी बहू को तुझे अब उम्र भर सफेद चुन्नी ही पहननी है।” कहते-कहते पापा फफक-फफक कर रो पड़े। हर कोई अपने भाव लफ़्जों से नहीं कह पाता। कुछ लोग बाहर से सख़्त बने रहते हैं उम्र भर। लेकिन अंदर उनके मन की मिट्टी गीली ही रहती। जरा-सी भावनाओं की बरसात होते ही अंकुरण हो जाता उनके भीतर प्यार का।
भाई की अचानक मृत्यु के बाद पापा जी को रिवाज के मुताबिक बहू के सर पर सफेद दुपट्टा डालना था। बिरादरी के लाख मना करने के बावजूद माँ ने पीला दुपट्टा मंगवाया पापा ने बेटियों के कंधे का सहारा लिया और माँ के घुटने थामे बैठी सिसकती हुई बहू के सर पर रोते-रोते डाल दिया।माँ उनका हाथ थाम जोर से विलाप कर उठी- ””हाय! हम 1यों न मर गए यह दिन देखने से पहले।”
बेटियाँ पापा से लिपट गईं। बहू ने पापा के पैरों पर हाथ रख दिया। पापा बोले- ””आज से तू मेरी बेटी की तरह रहेगी।”
दूर खड़े बड़े भाइयों की आँखे भी नम थीं। बिरादरी, सगे वाले रिश्तेदार,सबका फुसफुसाना जारी रहा, ””चुन्नी के भीतर से….।”
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