जून 2026

देशपीर पराई     Posted: November 1, 2021

वे महीने में तीन-चार बार परिवार सहित शहर के एक होटल में खाना खाने जाया करते थे। वेटर को टिप में कभी सौ रुपए,तो कभी और ज्यादा देते थे। एक बार पत्नी ने वेटर के जाते ही उनसे पूछा-‘‘आप वेटर को पाँच-दस रुपए टिप देने के बजाय, सौ या सौ से ज्यादा रुपए क्यों देते है?’’

‘‘इन बेचारों को तनख्वाह बहुत कम मिलती है।’’ उन्होंने जवाब दिया।

‘‘आपको कैसे पता कि इनको तनख्वाह कम मिलती है?’’

‘‘क्योंकि बेराजगारी के दिनों में मैंने भी कुछ महीने वेटर का काम किया था।’’

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine