जून 2026

देशपर्त-दर-पर्त     Posted: December 1, 2021

पति के क्लीनिक जाते ही मंजू ने फोन कर मधु को अपने घर बुलाया।

‘‘आह! क्या ठंडी-ठंडी हवा चल रही है, बाहर लॉन में ही बैठते है।’’ मधु ने आते ही कहा।

‘‘छोटू लॉन में पड़ी कुर्सियों पर कपड़ा मार दो और  दो गिलास पानी ले आओ।’’ मंजू ने आदेश दिया। ‘‘लगता है कहीं बारिश हुई है, तू बाहर न बुलाती तो मुझे पता ही नहीं चलता कि मौसम इतना अच्छा है।’’

तभी मंजू एक झटके से उठी और उसका हाथ पकड़कर बोली, ‘‘अंदर चलकर ए.सी. में बैठकर ही चाय पिएँगें।’’

‘‘अरे क्या हुआ, बाहर मौसम…’’

कमरे में आते ही मंजू ने एल.ई.डी. ऑन किया। घर का प्रत्येक कोना उसके सामने था और वह देख पा रही थी कि अब छोटू क्या कर रहा है। कामवाली बाई सोना बर्तन माँज रही है….मंजू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव आए।

उसने रिमोट से कलर्स चैनल लगाया। ‘इश्क में मर जावाँ’ धारावाहिक चल रहा था। ‘‘तुझे मैं यह बताना तो भूल ही गई कि यह  वाला स्मार्ट टी.वी. मुझे मेरे पति ने जन्मदिन पर गिफ्ट किया है, इसमें सारे एडवांस फीचर्स है। सबसे बड़ी बात इसमें एक साथ छह सी.टी.वी. कैमरों की रिकॉडिंग भी हो जाती है…और जब हम बाहर घूमने जाते हैं, तो मुझे वहाँ भी पता चल जाता है कि नौकर, माली, आया कहाँ और क्या कर रहे हैं, किससे बातें कर रहे है…कौन-कौन इनसे मिलने आता है, क्योंकि मेरा  मोबाइल भी इससे कनेक्ट किया हुआ है।’’

‘‘वास्तव में यह तो बहुत बढ़िया उपहार है, पूरी तरह बंधक बनाने के लिए….’’ दूसरा वाक्य मधु जबड़ों में चबा गई।

मंजू ने फिर रिमोट बेल बजाई, छोटू हाजिर हो गया। ‘‘दो बढ़िया-सी चाय और नाश्ता लगाकर ला।’’

‘‘और सुना, तूने आज सारा दिन क्या किया?’’

सुबह मेड से काम करा, स्टोरी बुक पढ़ी, बाजार गई…वापस लौटने पर चपातियाँ बनाई, लंच के बाद आराम किया, और अब तेरे पास बैठी हूँ…

‘‘इश्क में मर जावाँ में क्या हुआ? कलर्स चैनल लगाना, स्टोरी दिलचस्प हो गई है….अब आरोही का क्या होगा? सच में  बड़ा ट्विस्ट  आने वाला है….’’ मधु का ध्यान सीरियल में था।

अभी एक ही सीन देखा था कि स्क्रीन पर फिर से छह सी.सी.टी.वी. कैमरे झिलमिला उठे।

‘‘यह छोटू अभी तक चाय लेकर क्यों नहीं आया? देख तेा जरा मधु, सोना से बातें करने में लगा है और चाय उबले जा रही है।’’

रिमोट बेल बजते ही छेाटू दौड़ा आया। ‘‘इतनी देर लगती है क्या, चाय बनाने में….’’ मंजू का मुँह गुस्से से तमतमा रहा था।

‘जी अभी लाया….’’

‘‘और सुन! उसके बाद कपड़े प्रेस कर लेना, सोना का काम खत्म हो गया हो तो उसे भेज दे।’’

‘‘भगवान ने मुझे सब सुख दिए है मधु! रुपया-पैसा नौकर-चाकर, बस एक सेहत नहीं दी। मेरा ब्लडप्रेशर काबू में ही नहीं रहता, जब मर्जी शूट हो जाता है….ऊपर से शुगर  की बीमारी….कभी-कभी तो डिप्रेशन में चली जाती हूँ।’’

सुविधाओं का पिंजरा उसे खूब सता रहा है, पर मधु से कहे कैसे? डायमंड ज्वेलरी पहने किट्टी क्वीन मंजू का निराला अंदाज और होंठों पर कृत्रिम मुस्कान मधु के सामने थी।

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