गढ़वाली अनुवाद: डॉ . कविता भट्ट
‘‘कैकु फोन छौ?’’
सुरेखा न रुसाड़ा बिटि पूछी।
‘‘पिताजी कु छौ?’’ घौरवळा अमित न बताई।
‘‘वु बीमार छन। इलाजौ थैं दस हजार रुप्या माँगणा छा।’’
‘‘बोलि देंदि डाळा पर पैसा नि छन लगणा, जु तोडी द्योला। हम खुद अफी परेशानी माँ छौं।’’ सुरेखा न गुस्सा म बोलि।
अमित न अगनै कुछ नि बोलि और वु चुपचाप बाथरूम म नहेण चलि गे।
‘‘आज मि उंकु नम्बर ब्लॉक करी देन्दौ, जां सी वु दुबरा फोन न लगै सक्वन।’’ सुरेखा गुस्सा माँ रूसाड़ा बिटि बदबडै कि हॉल म आई और जन्नि मुबैल उठैकि नम्बर ब्लॉक कन्न चाई, वा परेसान ह्वे ग्याई। किलैकि वा जै नम्बर ब्लॉक कन्न चांणि छै, वु नम्बर अमित का पिताजी कु नि छौं, वीं का ई पिताजी कु छौ।