जून 2026

देशगति-चक्र     Posted: November 1, 2022

चमचमाती कारें एक एक कर अस्पताल के बाहर रूकने लगी और टाई की नॉट ठीक करते हुए क्लब के सदस्य जनरल वार्ड में दाखिल होने लगे। आज मरीजों को फल मिठाई आदि बाँट  कर प्रोजेक्ट पूरा करना था।

               फल दवाओं के पैकेट,प्रेस रिपोर्टर फोटोग्राफर टी.वी रिपोर्टर आदि सबके आ जाने पर कार्यक्रम शुरू किया गया।

               “सिस्टर क्या बीमारी है” एक साथ उइी कई आवाजों से घबड़ाकर ऑंखें खोलीं, पीड़ा के भाव चेहरे पर थे। एकाएक कुछ समझ नहीं आया, पर समझने की कोशिश करने लगा।

               ‘‘उठो ये दवाएं  ले लो।’’

               ‘‘यहाँ  मेज पर रख दो।’’

               ‘‘नहीं बैठ कर लो फोटो खिंचेगी।’’

               ‘‘नहीं बैठा जाएगा, बहुत दर्द है।’’

               “एक तुम्हें दवा और फल दे रहे हैं, लेने  में भी नखरा’’

               ‘‘साब, मुझे नहीं चाहिए।’’ हारकर वृद्ध बोला

               ‘‘सिस्टर सहारा देकर बैठाओ।’’

               ‘‘अरे मैं बैठाती हूँ ’’ अध्यक्ष की पत्नी ने कहा, ‘‘फोटोग्राफर कहां है?’’

               ‘‘हाँ , आप बैठाइए मैडम, थोड़ा सिर पीछे”  फोटोग्राफर ने ऐंगिल बनाया काँपते वृद्ध के हाथ में फल पकड़ाते हुए एक ग्रुप फोटो हुआ।

               जनरल वार्ड के हर मरीज को फल मिठाई बांटे गए, साथ ही दवाइयाँ भी, यह अलग बात थी कि दवा केवल ताकत की ही थीं। बाहर निकल कर सबने शरीर को ऐसे झाड़ा मानों बीमारी झाड़ रहे हों। अध्य़क्ष पत्नी सेंटेड रूमाल से चेहरा पोंछती बोली, ‘‘बुड्डे में से कितनी बदबू आ रही थी, शिट।’’ यह कहकर अपने कंधे हिलाए।

               ‘‘चलो, अब कहीं बैठकर कुछ फै्रश हुआ जाए।’’ नाक चढ़ाकर सचिव ने कहा।

               साथ ही सब कारों में बैठकर पंचसितारा होटल की ओर बढ़ गए, उनके जाते ही सिस्टर ने दवाइयाँ बटोरी, ‘‘यह तुम्हारे मर्ज की नहीं है। जो जिसके हाथ आई दवा दे दी, अरे मर जाओगे तुम सब।’’ मरीजों ने घबड़ा कर सब दवाइयाँ सिस्टर को सौंप दीं।

               डिब्बे में भरकर वे दवाइयाँ अस्पताल के बाहर दवा की दुकानों पर पहुंचकर उन्हीं मरीजों के लिए बिकने लगीं।

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