प्रोफेसर शरदकान्त रिटायरमेन्ट के बाद शहर की एक पॉश कॉलोनी में मकान बनाकर रहने लगे थे। कालोनी में सभी सम्पन्न लोग रहते थे। कोई डॉक्टर था तो कोई इंजीनियर, कोई ठेकेदार था तो कोई व्यवसायी। सबके घरों में आधुनिक सुख-सुविधा के सभी साधन मौजूद थे।
प्रोफेसर शरदकान्त बड़े सिद्धान्तवादी थे। उन्होंने जीवन में कभी कोचिंग नहीं पढ़ाई और न ही बे अपने अधीन शोध करने बाले छात्रों से कोई पैसा नहीं लेते थे। कई गरीब छात्रों की फीस बे अपने वेतन से भरते थे। प्रोफेसर शरदकान्त का शहर में बड़ा सम्मान था।
प्रोफेसर शरदकान्त की पत्नी हमेशा उनसे बड़ी असन्तुष्ट सी रहतीं। वे कालोनी की अन्य महिलाओं के पास महंगी-महंगी साड़ियाँ और नए-नए गहने देखती तो उन्हें उनसे बड़ी ईर्ष्या होती। वे सोचती कि यदि उनके पति भी कोचिंग करते होते तो उनके पास भी महंगी साड़ियां एवं नए – नए गहने होते। वे बात-बात में शरदकान्त को ताना देती रहतीं मगर शरदकान्त पर इनकी इन जली-कटी बातों का कोई असर नहीं होता था । बे शान्त भाव से सबकुछ सुनते रहते।
आज कालोनी के एक बड़े व्यवसायी के यहां एक कार्यक्रम हो रहा था। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव मुख्य अतिथि के रूप में पधार रहे थे। उनके स्वागत में जिले के सारे आला अधिकारी भी कार्यक्रम में आने वाले थे। कालोनी के सभी लोग आमंत्रित थे। प्रोफेसर शरदकान्त को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। वे अपनी धर्मपत्नी के साथ समय से कार्यक्रम पहुंच गये । आयोजकों ने बड़े आदर के साथ उन्हें अग्रिम पंक्ति में पड़े सोफों पर बैठाया। कालोनी की सभी महिलाएं नए-नए परिधानों में सजी-धजी चहकती फिर रही थीं। शरदकान्त की धर्मपत्नी को उनके भाग्य से ईर्ष्या हो रही थी।
तभी मुख्य अतिथि के आगमन की सूचना मिली। आयोजक आदरपूर्वक उन्हें मंच पर लेकर आये। मुख्य अतिथि ने अपने सामने बैठे लोगों की ओर नजर डाली। प्रोफेसर शरदकान्त को देखकर वे कुछ सोचने लगे। उन्होंने एक आयोजक को बुलाकर कुछ पूछा। आयोजक के स्वीकृति में सिर हिलाते ही मुख्य अतिथि मंच से उठे और नीचे की ओर चल दिए। सब लोग हैरान थे और आश्चर्य से मुख्य अतिथि की ओर देख रहे थे।
वे मंच से उतरकर सीधे प्रोफेसर शरदकान्त के पास पहुंचे। उन्होंने कहा-‘सर मैं आपका स्टूडेन्ट प्रणव कुमार। आज मैं जो कुछ हूँ आपकी वजह से हूँ। अगर आप तीन बर्ष तक मेरी फीस जमा नहीं करते तो शायद मैं अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता।’ यह कहकर उन्होंने बड़ी श्रद्धा से प्रोफेसर शरदकान्त के पैर छू लिए थे।
कालोनी के सारे लोग बड़े आश्चर्य ये यह नजारा देख रहे थे। शरदकान्त जी की धर्मपत्नी का सिर गर्व से ऊँचा हो गया था। उन्होंने..विजयी भाव से कालोनी की महिलाओं की ओर देखा था। आज कालोनी की महिलाओं को पहली बार शरद कान्त जी की पत्नी के भाग्य से ईर्ष्या हो रही थी।
-0-सुरेश बाबू मिश्रा, मोबाइल नं. 9411422735,
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जून 2026
देशईर्ष्या Posted: December 1, 2022
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