बबलू ने दादी से पूछा, “दादी, इस कदर मुँह लटकाकर क्यों बैठी हो..? सभी
रिश्तेदार आये थे तब तो तुम बहुत खुश थी.”
दादी ने समझाया, “बेटा, जब रिश्तेदार आते हैं तो ख़ुशी बहुत होती है. मगर उनके
जाने पर दुःख भी उतना ही होता है.”
स्मार्ट पोते ने कहा, “दादी, तुम पुराने ख्यालों की हो, इसीलिए सुख-दुःख के
झमेले में पड़ जाती हो. हमें देखो. हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ा. वे आए, तो हमें कोई
बहुत ख़ुशी भी नहीं हुई और उनके जाने पर कोई दुःख भी नहीं हुआ.”
दादी को इस बात से बड़ा अचरज हुआ. उन्होंने पूछा, “रिश्तेदारों से मिलने पर ख़ुशी
और बिछड़ने पर दुःख नहीं होता क्या..?”
पोते ने जवाब दिया, “हम रिश्तेदारों से इतने जुड़ते ही कहाँ हैं कि उनके आने-जाने
पर हमें सुख-दुःख हो.”
दादी की हैरानी बढ़ गयी. पूछा, “क्या मतलब…?”
पोते ने बड़े ही ढीठ अंदाज में कहा, “मतलब यह कि जब वे आए, तो भी हम स्मार्ट फोन
और स्मार्ट टीवी में डूबे रहे. जब वे चले गए, तो भी हम वहीं रमे हुए हैं. सच देखो
तो हमें तो उनके आने-जाने का बहुत पता भी नहीं चला. फिर सुख-दुःख कैसा…?”
पोते की दिल तोड़ने वाली ऐसी निर्मोही बातें सुनकर दादी ने घुटने में अपना सिर छुपा लिया और आँसू बहाने लगी.
-0— ज्ञानदेव मुकेश,फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,अल्पना मार्केट के पास,
न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी,पटना-800013 (बिहार)
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जून 2026
देशपुराने ख़्याल Posted: December 1, 2022
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