जून 2026

देशआराध्य -पूजन     Posted: January 1, 2023

रात भर दर्द से छटपटाती  वह कब सोई उसे खुद  पता  नहीं चला ।

 शायद  पिछले जन्म का कोई  दोष ही इस जन्म में   दैहिक कष्ट  की टीस बन कर  उसके जीवन में  विष की भाँति घुल सा  गया है । गृहस्थ जीवन के सुख से वंचित वो अपने कर्तव्यों से भी विमुख हो  वैराग्य भाव से भर उठी  है । पीड़ादायी अनुभवों , व्यथित मन , गृहकार्य   न कर  पाने की विवशता के कारण वह  निराशा के  भँवर में  जा फँसी है ।  एक पल का ही सही  चैन मिल जाए, यहीं सोच लिये उसने खुद  को  दिन रात पूजा पाठ में झोंक रखा है ।

आज हरिशयन एकादशी है  वह  बड़ी मुश्किल से  नहाकर पूजा के बरतन माँजते हुए सोचने लगी  भगवान की कृपा रही तो एक ना एक दिन उसे  पूजा का फल जरूर मिलेगा मेरे आराध्य मेरी साधना से प्रसन्न हो कर मेरे कष्ट का निवारण जरूर करेंगे । 

तभी रसोई से झूठे बरतन माँजने की आवाज आई। आज   बाई  छुट्टी पर  है फिर ये बरतन कौन माँज रहा ?.

ओह!  शायद पति धो रहे होंगे। उसने जोर से उन्हें  आवाज लगाई-“सुनो पहले नहा कर पूजा कर लो, फिर कुछ करना तुम्हें ऑफिस भी तो   जाना है।”

” हाँ आता हूँ। बच्चे भूखे हैं। पहले खाना बना दूँ, फिर पूजा करता हूँ।” उधर से आवाज आई।

वह   मनोयोग से  घंटी बजाकर आरती करने लगी।  तभी रसोईघर से प्रेशर कुकर की सीटी बज उठी ।

लो  पति  ने तो  खाना  भी चढ़ा दिया है।  वह उन सब को अनसुना करते हुए  जोर- जोर  से पाठ करने लगी ।

आरती करते हुए अचानक से उसकी दृष्टि   आरती की ज्योति के कारण  भगवन की प्रतिमा पर उभरती अलौकिक तेज की ओर गई, जो आज कुछ ज्यादा ही चमक रही थी। वह प्रसन्न होकर और भी उत्साह  के साथ भक्ति भाव से आरती करने लगी ।

आरती के क्रम में  उसने देखा कि जब भी रसोईघर से प्रेशर कुकर की आवाज आती भगवान की प्रतिमा पर  एक अलग सी  अलौकिक तेज के  संग एक तीक्ष्ण  मुस्कान भी  तैर जाती ।

 यह देख वह आरती के बीच ही फिर चिल्लाई- “अरे आओ पूजा कर लो, समय बीता जा रहा। “

उधर से फिर वहीं आवाज आई– “आता हूँ, पहले बच्चों को खाना परोस दूँ।”

  भगवान के मुख पर  इस बार  प्रखर  मनमोहक मुस्कान  तैर गई। 

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