प्यारा सा सपना दे जा रे
वैष्णवी बहुत ही धनवान और सुन्दर लड़की है साथ ही खूब पढ़ी-लिखी भी है। मुझसे थोड़ी- सी दोस्ती मानती है। प्यार-प्यार कुछ नहीं है। मैं ही मरा जाता हूँ उनके लिए।
“एक दिन बातों ही बातों में वे कहने लगीं। कल रात की बात बताऊँ आलोक।”
“हाँ बताओ ।” मैं बिना बात के ही खुश था।
“कल मैंने एक सपना देखा।”- वे बोली।
“क्या।”- मुझे लगा शायद उन्होंने सपने में मुझे देखा होगा।
“सपने में, मैं हूँ और एक बहुत धनवान सुन्दर सा लड़का मुझे अपनी बाहों में झूला झुला रहा है और ……………..मैं…………….. ……………..मैं…………….।” वे आगे भी बताना चाह रही थी कि रोक दिया था मैंने। और पूछ लिया था, “वैष्णवी, क्या आपके सपनों में कभी कोई निर्धन, निश्छल और प्यारा- सा लड़का नहीं आता?”-वे मेरे प्रश्न पर सोचने लगी थी। उत्तर खोज रही थी। मैं इंतजार कर रहा हूँ अपने उत्तर का ।
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