जून 2026

चर्चा मेंमिन्नी कहानी लेखक मंच का 29 वाँ सम्मेलन सम्पन्न।     Posted: November 1, 2023

देश के विभिन्न प्रदेशों से लेखकों ने लिया भाग -नाटकों की प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र।हरभजन खेमकर्णी, डॉ. हरजिंदर सिंह अटवाल सहित दस प्रमुख साहित्यकार सम्मानित।लगभग दो दर्जन पुस्तकें और पत्रिकाओं का हुआ लोकार्पण।

अमृतसर: मिन्नी कहानी लेखक मंच (पंजी) और लोक मंच पंजाब द्वारा ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसाइटी (पंजी) और त्रैमासिक ‘मिन्नी ‘ के सहयोग से 29वां अन्तर्राज्यीय मिन्नी कहानी/ लघुकथा सम्मेलन अमृतसर पंजाब की पावन धरती पर भगत पूरन सिंह पिंगलवाड़ा की मानांवाला शाखा के माता मेहताब कौर हॉल में आयोजित किया गया। इसमें पंजाब के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल से 100 से अधिक लेखकों ने भाग लिया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शुरुआत  करते हुए मिन्नी कहानी लेखक मंच  (रजि.) के महासचिव, जगदीश रॉय कुलरियाँ  ने अन्तर्राज्यीय सम्मेलनों  के महत्व के बारे में बात की और दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा साँझी की। इसके तुरंत बाद मंच के अध्यक्ष डाॅ. श्याम सुन्दर दीप्ति की ओर से उनकी पत्नी श्रीमती उषा दीप्ति ने भिभिन्न प्रदेशों से पधारे साहित्यकारों का स्वागत किया तथा पिंगलवाड़ा संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद डाॅ. भगत पूरन सिंह पिंगलवाड़ा की मुख्य सेवादार डॉ इंदरजीत कौर ने अपने संबोधन के दौरान लेखकों से समाज को बेहतर बनाने के लिए रचनाएं लिखने और दीन दुःखियों के दुखों के बारे में बात करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इस समय प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए भगत पूरन सिंह जी ने जीवन भर काम किया है। उन्होंने लेखकों को भी इस दिशा में लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके तुरंत बाद पहला सत्र जो ‘छात्रों, युवाओं और अंतर्राष्ट्रीय लेखकों की रचनाये’ विषय पर आधारित था, डॉ.  कुलदीप सिंह दीप, प्रसिद्ध नाटककार और आलोचक द्वारा निर्देशित किया गया।  सत्र की अध्यक्षता लघुकथा शोध केंद्र भोपाल (मध्य प्रदेश) की अध्यक्ष कांता रॉय ने की. डॉ  दीप ने इस सत्र का संचालन करते हुए लघुकथा विधा के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा और पढ़ी गयी रचनाओं की  समीक्षा की। इस बेहद महत्वपूर्ण सत्र में माया देवी मेमोरियल स्कूल केरा खेड़ा की छात्राएं मनदीप कौर, रजनीत कौर, खुशमन कौर और रिया के अलावा मिन्नी कहानी/ लघुकथा पाठ में शबनम सुल्ताना (भोपाल), राजिंदर रानी, संदीप सोखल, मनप्रीत कौर, रंजीत सिंह कलेर, तृप्ता बरमौता, मंजीत कौर धीमान, नीरू मित्तल नीर (पंचकूला), सुनीता प्रकाश (भोपाल) ने अपनी-अपनी लघुकथाएँ पढ़ीं। अंतरराष्ट्रीय लेखकों चेखव, मैक्सिम गोर्की, सआदत हसन मंटो, मुशी प्रेम चंद, खलील जिब्रान की लघुकथाओं का वाचन डॉ  भवानी शंकर गर्ग, परमजीत कौर शेखूपुर कलां, महिंदर पाल बरेटा, गुरसेवक सिंह रोडकी, दर्शन सिंह बरेटा और बीर इन्दर बनभौरी द्वारा किया गया। डॉ दीप ने इन रचनाओं के सन्दर्भ में वर्तमान काल की लघुकथाओं की पड़ताल की । श्रीमती कांता रॉय ने कहा कि पंजाब में मिन्नी कहानी  पर बहुत अच्छा काम हो रहा है जो हम सभी के लिए प्रेरणा है और ऊर्जा प्रदान करता है . इसके बाद आयोजन का दूसरा सत्र ‘लघुकथा  पाठ एवं चर्चा’ पर आधारित था। जिसमें पंजाब व अन्य राज्यों के  साहित्यकारों ने भाग लिया। सत्र का संचालन गुरप्रीत कौर ने किया। इसमें डाॅ. नायब सिंह मंडेर (हरियाणा), सुरिंदर कैले, रेखा सक्सैना (भोपाल), डाॅ. नवजोत कौर लवली, डॉ. हरजिंदर कौर कंग, राजिंदर माजी, सीता राम गुप्ता (दिल्ली), सरिता बाघेला अनामिका (भोपाल), अशोक दर्द (डलहौजी, हिमाचल प्रदेश), सुरिंदरदीप, सीमा वर्मा, डॉ. शील कौशिक (हरियाणा), अरुण धर्मावत (राजस्थान), डाॅ. इंदरपाल कौर, राजदेव कौर सिद्धू, कल्पना भट्ट (भोपाल), सीमा भाटिया, सुरजीत सिंह जीत, अजीत नबीपुरी, डाॅ. नीरजा सुधांशु (बिजनौर, उत्तर प्रदेश), मंजीत कौर अंबालवी (हरियाणा), कैलाश ठाकुर और अंजू खरबंदा (दिल्ली) ने अपनी-अपनी लघुकथाएँ पढ़ीं, जबकि लघुकथा कलश के संपादक योगराज प्रभाकर और त्रैमासिक ‘छिन्न’  के संपादक डॉ हरप्रीत सिंह राणा ने आलोचनात्मक  टिप्पणियाँ कीं। दोनों विद्वानों ने लघुकथा एवं लघुकथा की विधायी संरचना के अनुसार लेखकों को मार्गदर्शन दिया तथा रचनाओं की कमियाँ भी बताईं। तीसरा सत्र भी लघुकथा वाचन एवं चर्चा पर आधारित था। जिसमें गुरुमीत रामपुरी, रंजीत आजाद कांझला , डाॅ. हरप्रीत सिंह राणा, देविंदर पटियालवी, साधु राम लांगेआना , कंवलजीत भोला लांडे, सुभाष नीरव (दिल्ली), बेबी कारफोर्मा (पश्चिम बंगाल), प्रतिभा त्रिवेदी  (ग्वालियर), बलराज कुहाडा , गुरुमीत मराड, सनेह गोस्वामी, देविंदर सिंह पनेसर (दिल्ली), परगट सिंह जंबार, राधेश्याम भारतीय (हरियाणा), मदन लाल (हरियाणा), डाॅ. अशोक वैरागी (हरियाणा), कांता रॉय (भोपाल), मेजर शक्ति राज (सिरसा), घनश्याम मैथिल (मध्य प्रदेश), उषा दीप्ति, बूटा खान सुखी, परमजीत कौर शेखपुरकलां, लाजपत राय गर्ग (पंचकूला), महेंद्रपाल बरेटा और हरभजन सिंह खेमकर्णी ने रचनाये पढ़ी. आलोचक डॉ.  नायब सिंह मंडेर और हरियाणा प्रदेशिक लघुकथा मंच के अध्यक्ष डाॅ. शील कौशिक ने लघुकथाओं की विवेचना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर की लघुकथा/लघुकथा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है और किसी भी विषय को अभिव्यक्त करने की क्षमता रखती है। इस सत्र का संचालन प्रिंसिपल दर्शन सिंह बरेटा ने किया। पहले दिन चौथे एवं अंतिम सत्र में डाॅ. राजवीर सिंह, कृषि विज्ञानी/ट्रस्टी पिंगलवाड़ा अमृतसर मुख्य अतिथि थे और अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं अनुवादक सुभाष नीरव ‘दिल्ली’ और लाजपत राय गर्ग, पंचकूला ने की। डॉ श्याम सुंदर दीप्ति ने अतिथियों का स्वागत किया और अंतरराज्यीय मिनी कहानी आयोजन और मिन्नी  कहानी की वर्तमान स्थिति के बारे में बात की। डॉ राजबीर सिंह ने जैविक खेती के महत्व और वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता पर भाषण दिया और लेखकों से किसी भी माध्यम से जैविक खेती के महत्व को बढ़ावा देने की अपील की।इसके बाद मंच की  ओर से आयोजित 33वें  मिन्नी कहानी मुक़ाबले  के विजेतााओं  गुरमीत सिंह मराड, सोमा कलसियां, डॉ. साधु राम लंगेआना, रमनदीप कौर रम्मी और जसवीर भलूरियां को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही ‘विदेशी मिन्नी कहानियां ‘ (सं.: डॉ. दीप्ति, अग्रवाल, नूर), ‘आलोचना दृष्टि-मिन्नी कहानी पेशकारी ते पसार’ डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति, ‘दर्शन मितवा दियां मिन्नी  कहानियाँ – अंतर्दृष्टि और समीखियाँ ‘ (सं.:जगदीश रॉय कुलरियां), पत्रिका ‘शबद थिरंजन’ (सं.:मंगत कुलजिंद), ‘सो पत मछली  दे’ (भूपिंदर सिंह पीसीएस) पुनर्मुद्रण: योगराज प्रभाकर, ‘ग्राहने सूरज’ (दलीप सिंह भूपाल ) पुनर्मुद्रण: योगराज प्रभाकर, पत्रिका ‘पंजाब स्काउट संदेश’ संपादन: दर्शन सिंह बरेटा , ‘सोन सवेरा’ (कहानी संग्रह) सुरिंदर कैले, रूपांतर सीमा वर्मा, पत्रिका ‘छिन्न’ (संपादक: त्रिपत भट्टी, हरप्रीत सिंह राणा, देविंदर पटियालवी), ‘किंग्स वे कैंप दिल्ली-9’ – अंजू खरबंदा, ‘अब जूझन का दाओ’ (संपादक: शरण मक्कड़, अनवंत कौर) पुनर्प्रकाशित: योगराज प्रभाकर, ‘टिंडा दा पानी’ (विचार संग्रह) दर्शन सिंह ब्रेटा, ‘घुझिआ पैडा ‘ (हाइकु संग्रह) महेंद्र पाल ब्रेटा, ‘अणु’ त्रैमासिक – सुरिंदर कैले द्वारा संपादित और ‘अभी कहना शेष है’ (अरुण धर्मावत, सीमा भाटिया द्वारा संपादित) पुस्तकें लोकार्पण की गई। डॉ दीप्ति और जगदीश कुलरिया द्वारा संपादित पुस्तक ‘गलवक्कडी’ पर आधारित लोक कला मंच मजीठा की टीम ने गुरमेल शामनगर के निर्देशन में भावनात्मक नाटक प्रस्तुत किया। साहित्यकारों ने देर रात तक सांस रोककर इस प्रस्तुति को देखा। दूसरे दिन की शुरुआत ‘पिंगलवाड़ा’ संस्था के वार्डों के भ्रमण से हुई। बाहर से आए लेखकों ने पिंगलवाड़ा की कार्यशैली का बारीकी से अनुसरण किया। इसके बाद प्रथम सत्र की शुरुआत ‘प्रयोगात्मक एवं विलक्षण  प्रकार की लघुकथाओं’ के पाठ से हुई। जिसमें कुलविंदर कौशल ने ‘ठक ठक ठक’, बीर इंदर बनभौरी ने ‘नायक ‘, दिव्या शर्मा  (गुड़गांव) ने ‘कूड़ेवाला’, गुरप्रीत कौर ने ‘बेबे दी  कॉपी’ और सोमा कलसिया ने ‘टुकड़े’ शीर्षक से लघुकथाये  सुनाईं। इसके बाद नागपुर (महाराष्ट्र) से पधारे हिन्दी विद्वान डाॅ. मिथलेश अवस्थी ने ‘लघुकथा साहित्य में संभावनाएं तलाशने का समय ‘ विषय पर एवं डाॅ. बलजीत कौर रियाड, सहायक प्रोफेसर, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर ने ‘मिन्नी कहानी  साहित्य में संभावनाओं की खोज का समय’ विषय पर अपना शोध पत्र पढ़ा। दोनों विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि मिन्नी कहानी /लघुकथा  में भविष्य में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन विशेष रूप से नए लेखकों को इस शैली को समझने की जरूरत है। यह उतना सरल नहीं है जितना दिखता है। इसकी कार्यप्रणाली एवं संरचना का अध्ययन करने की आवश्यकता है। डॉ  अशोक भाटिया, करनाल, डाॅ. प्रदीप कौडा , निदेशक अकादमिक एक्सीलेन्स , गुरु कांशी यूनिवर्सिटी तलवंडी साबो और डॉ. नायब सिंह मंडेर ने पढ़े गए इन शोध पत्रों पर  बोलते हुए  कहा कि पंजाबी, हिन्दी में एक ऐसी पुस्तक अवश्य होनी चाहिए जिसके सिद्धांत सार्वभौमिक हों ताकि यह विधा और अधिक फैल सके। उन्होंने इस विधा के पचास साल के इतिहास का भी जिक्र किया और पत्रों को विस्तार दिया।  कार्यक्रम के दूसरे सत्र, जो ‘पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह’ था, में डाॅ.  इंद्रजीत कौर, मुख्य सेवादार  भगत परन सिंह पिंगलवाड़ा अमृतसर, मुख्य अतिथि और लोक मंच पंजाब के अध्यक्ष और ‘अपनी आवाज’ के मुख्य संपादक सुरिंदर सिंह सुन्नर विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. लखविंदर सिंह जोहल, अध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना, डाॅ. कुलदीप सिंह, अध्यक्ष पंजाबी विभाग, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र एवं मंच के अध्यक्ष डाॅ. श्याम सुन्दर दीप्ति द्वारा की गई । स्वागती  शब्दों के बाद त्रैमासिक ‘मिनी’ का अंक 140, ‘पिंगलावाड़ा एक प्रेमशाला’ डाॅ. श्याम सुंदर दीप्ति अनु: लाजपत राय गर्ग, पत्रिका ‘अपनी आवाज’ – संपादक सुरिंदर सिंह सुन्नड, डाॅ. लखविंदर जोहल, ‘मिन्नी  कथावां दे आंग संग’ (मिन्नी  कहानी संग्रह) संपादित: डॉ. कुलदीप सिंह, ‘नुक्ता निगाह’ ग़ौरतलब मिन्नी कहानिओं  के सन्दर्भ में (आलोचना) प्रो. गुरदीप ढिल्लों, त्रैमासिक ‘मेला’ मिन्नी  कहानी विशेषांक (राजिंदर माज़ी द्वारा संपादित) और बारिश एते होर मिन्नी कहानियां (सुभाष नीरव, अनुवाद जगदीश रॉय कुलरिया) पुस्तकें और पत्रिकाएँ  जारी की गईं। इसके बाद सम्मान समारोह शुरू हुआ। जिसमें मिन्नी कहानी मंच  की तरफ से ‘गुरबचन सिंह कोहली यादगारी मिन्नी कहानी सहयोगी पुरस्कार 2022’ – डॉ नवप्रीत सिंह हंसपाल अमृतसर, ‘गुलशन राय यादगारी मिन्नी कहानी सर्वोत्तम पुस्तक पुरस्कार 2022’- मिन्नी कहानी संग्रह ‘कोध्रे दी  रोटी ‘ के लिए तृपत भट्टी  , ‘अमरजीत सिंह सरीह  एएसआई यादगारी मिन्नी कहानी आलोचक पुरस्कार 2022’- डॉ कुलदीप सिंह दीप , ‘माता महादेवी कौशिक यादगारी लघुकथा पुरस्कार 2022’  – डॉ कमल चोपड़ा, ‘श्री गोपाल विन्दर मित्तल यादगारी मिन्नी कहानी खोज पुरस्कार 2022’- डॉ हरप्रीत सिंह राणा , ‘श्री राजिंदर कुमार नीटा यादगारी मिन्नी कहानी युवा लेखक पुरस्कार 2022 ‘-गुरसेवक सिंह रोडकी और ‘कॉमरेड जसवंत सिंह कार शिंगार यादगारी मिन्नी कहानी विकास पुरस्कार 2022 -डॉ हरजिंदर सिंह अटवाल’ साहित्य संपादक , रोज़ाना नवां ज़माना  को दिया जायेगा। ‘लघुकथा कलश’ पत्रिका के सहयोग से दिए जाने वाले पुरस्कारों में  श्री रोशन फूलवी यादगारी मिन्नी कहानी लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार इस बार मिन्नी कहानी के क्षेत्र में जीवन भर के योगदान को देखते हुए हरभजन सिंह खेमकरनी को प्रदान किया गया । जब कि रवि प्रभाकर लघुकथा स्मारक पुरस्कार-डॉ शील कौशिक सिरसा  और श्रीमती उषा प्रभाकर लघुकथा पुरस्कार से श्रीमती स्नेह गोस्वामी को सन्मानित किया गया । सम्मानित लेखकों की उपलब्धियों से संबंधित वीडियो क्लिप भी साँझा  किये गये तथा सम्मानित लेखकों ने अपने दिल की बातें भी व्यक्त  कीं। इसके बाद लोक मंच पंजाब के प्रधान सुरिंदर सिंह सुन्नड ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि हर साल इस संस्था और इस कार्यक्रम में आकर उन्हें विशेष सुकून मिलता है। उन्होंने कहा कि मिन्नी  कहानी विधा बड़े पैमाने पर साहित्य पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। ऐसे आयोजन विधा के विकास एवं प्रसार के लिए ऊर्जा का काम करते हैं। डॉ  कुलदीप सिंह, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में छोटी विधाओं का बोलबाला है। यह समय मिन्नी कहानी जैसी शैली के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान अब इस विधा पर ध्यान दे रहे हैं और वे अपनी ओर से प्रयास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मिन्नी कहानी विधा का विरोध करते हैं वे अब स्वयं लघुकथाएँ या लघु रचनाएँ रच रहे हैं। डॉ  लखविंदर सिंह जोहल, अध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना  ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा इस शैली को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना इस शैली और इसके लेखकों के लिए एक बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि मिन्नी कहानी लेखक  लगातार इस विधा के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं और ऐसे आयोजनों में आकर मुझे खुशी मिलती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह विधा जीवन की सूक्ष्म घटनाओं को अपनी कला में उतार रही है। वर्तमान समय में इस विधा को विषय एवं विचारधारा की दृष्टि से मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि अन्य पत्र-पत्रिकाओं के अलावा ‘अपनी आवाज’ और ‘नवां ज़माना ‘ भी इसके विकास के लिए लगातार प्रयासरत हैं. डॉ इंदरजीत कौर मुख्य सेवादार भगत पूरन सिंह पिंगलवाड़ा ने अपने पहले दिन के  भाषण को विस्तार देते हुए मानवता की भलाई और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने का आह्वान करते हुए पिंगलवाड़ा संस्था द्वारा विकलांगों, बीमारों, असहायों और अन्य लोगों के लिए किए जा रहे जन कल्याण कार्यों पर प्रकाश डाला। . बीर इंदर बनभौरी ने सभी का धन्यवाद किया तथा मंच का संचालन जगदीश कुलरिया ने किया। इस कार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा परवीन अवि, अवतार कमल, हरिंदरपाल सिंह खेमकर्णी, डाॅ. महल सिंह भुल्लर प्रिंसिपल खालसा कॉलेज, नरेंद्रपाल सिंह (प्रेस प्रभारी, पिंगलवाड़ा), योगेश सूरी, सुमतीरा माज़ी, पवनदीप, डॉ. गुरुमीत सिंह, जय सिंह, जतिंदरपाल सिंह, डाॅ. प्रशोतम लाल, अमनदीप सिंह आदि ने भाग लिया। देश के विभिन्न कोनों से आये साहित्यकारों ने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी तथा पिंगलवाड़ा संस्थान के नेक कार्य की सराहना की। वे पिंगलवाड़ा संस्थान के सेवकों की निःस्वार्थ सेवा से बहुत प्रभावित हुए। लगातार दो दिनों तक चले इस आयोजन में साहित्यकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इसे सफल बनाने के लिए मिन्नी कहानी लेखक मंच (पंजी ) के सभी सदस्यों ने दिन-रात मेहनत की।

-जगदीश राय कुलरियाँ

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