जून 2026

देशबुद्ध     Posted: January 1, 2024

महाबोधि-मंदिर को दूर से ही प्रणाम करते हुए,उन्होनें अपनी मनोकामना पूर्ण  होने की मन्नत माँगी। कुछ ही देर में  वे रघुआ के कच्चे-घर के बाहर खाट पर बैठे थे। दूर तक फैले विशाल खेतिहर जमीन को देखते हुए उन्होंने सोचा–“अब सब झमेला खत्म हो जायेगा। बार-बार फसल बुआने-बेचने में  छुट्टी बर्बाद होती है। अभी दो  महीने पहले ही तो धान की फसल कटवा-बेचकर गये थे। अच्छा है,अब बिल्डर को रिसॉर्ट बनाने देकर,करोड़ों में खेलेंगें!”

बिल्डर का इंतजार  करते हुए,उनकी आँखों में रिसॉर्ट  का स्वरूप झिलमिलाने लगा–दूर तक फैले रि रिसॉर्ट में लॉन टेनिस,वॉलीबॉल, टेबुल-टेनिस आदि अनेक प्रकार के खेलों के शानदार कोर्ट, कृत्रिम  झील में तैरते छोटे-बड़े,जल-नौकाएँ …चीन, जापान, श्रीलंका,थाईलैंड आदि अनेक देशों के बौद्ध-धर्मावलंबियों और पर्यटकों से गुलजार रिसॉर्ट!! 

उनके चेहरे पर अभिमान का भाव झलका तो गर्दन थोड़ी अकड़ने लगी।रौबदार आवाज में रघुआ को आवाज दी-

“का रे रघुआ, यहाँ से बुद्ध-भगवान का मंदिर दस-बारह किलोमीटर ही होगा न? बिदेशी लोग तो इधर खूब आते होंगें?”

“जी हुजूर, मंदिर तो ज्यादा दूर नहीं है। बाकी बिदेसी सबका हमको नहीं पता। हमनी का तो दिन आप मालिक लोगन के खेती-बारी और गाय-गोरू में बीत जाता है…बच्चा सब सरकारी स्कूल में पढ़-लिख रहा है, और जिनगी में का चाही।” 

रघुआ ने ताजे दही का छाछ उन्हें थमाते हुए जिस  निस्पृह भाव से कहा, उसके सामने उन्हें अपना  करोड़ों का सपना बड़ा ओछा लगा।

ताजे छाछ के स्वाद में घुली उनकी जुबान लटपटा गई  और वे फोन पर कह रहें थें-“सॉरी, मुझे वह  प्रोजेक्ट  कुछ खास नहीं लग रहा।”

फोन काटते ही उन्हें बोध हुआ कि उनके  सिर से एक बड़ा बोझ उतर गया है। चारों ओर नजर घुमाई तो रघुआ और  आस-पास रह रहे अपने खेतों में काम करनेवाले भूमिहीन परिवारों को अपने दैनिक  कार्यकलापों में व्यस्त देखा,उनकी आँखें खुशी से भर आईं और वे असीम आनंद में डूब गए।

   -0-पूनम कतरियार,  202, ओम निलय अपार्टमेंट , बोरिंग कैनाल रोड (पश्चिम), खेतान गली,पटना-1

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