जून 2026

देशमशीनीकरण     Posted: February 1, 2024

 ”सैम मेरी स्टडी के अनुसार आपाधापी की इस उलझन भरी जिंदगी में गम, खुशी, प्रेम जैसी संवेदनाएँ ही मानव तरक्की में अवरोध का  कारण हैं ।”

“मैंने भी रिसर्च के बाद यही पाया एलिसा कि मशीनों के इस अति आधुनिक युग में यह संवेदनाएँ ही हमारी तरक्की रोकने का कारण बन रही हैं।”

“वैसे हमने और हमारे साथियों ने काफी हद तक मानव दिमाग़ की प्रोग्रामिंग कर यह सब रोक लिया है।  रिजल्ट भी अच्छे मिले हैं।”

“यह सही भी है एलिसा। बंधन मुक्त होने से आज मानव बहुत खुश है।  मैं पुरानी सदी के कुछ डाटा सर्च कर रहा था।  यह देखो कुछ फोटोग्राफ्स सेव किए हैं तुम्हें दिखाने को।”

“सैम बड़ी अनोखी पिक्चर्स ढूँढकर लाए हो। इसमें लड़कियों ने ये क्या कपड़े पहने हैं! और यह हाथ- पैरों में भारी- भरकम-  सा मेटल का क्या पहन रखा है?”

“एलिसा यह पिक्चर देखो! कितने लोग एक साथ बैठे हैं? ये क्या कर रहे हैं? कहीं खुश दिख रहे हैं, तो कहीं रो रहे हैं।”

“सैम यह पिक्चर देखो!सब इतने छोटे बेबी को क्यों घेरे खड़े हैं ?यह क्या गोल-  सा यंत्र है?यह सब इकट्ठे हँस रहे हैं? कोई पर्व-  सा लग रहा है। यह तस्वीर तो देखो! कितना रंग लगा है चेहरे पर।  हर पिक्चर में संवेदना भरी पड़ी हैं।”

“एलिसा रिसर्च के वक्त मैंने पढ़ा था तब विवाह और परिवार जैसी संस्था होती थी।  लोग एक दूसरे की देखभाल करते थे। एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़े होते थे।  यह लोग एक दूसरे के लिए जीते थे।  कितना अजीब लग रहा है न।”

“सैम!कैसे कोई किसी के बंधन में इतना रह सकता है। कमाल है< जो काम रोबोट कर सकते थे।  यह लोग उन कामों में एनर्जी वेस्ट करते थे।  तभी कुछ कर नहीं पाए।” 

“शायद नहीं कन्फर्म एलिसा।  ये संवेदनाएँ तरक्की में रोड़ा होती हैं।”

“ओह सैम कितना अच्छा है कि हमने यह संवेदनाएँ निकालने में सफलता प्राप्त कर ली। आज हम लोग कितने अच्छे तरीके से रहते हैं।  न कोई जिमेदारी, न कोई जबाबदेही। तुम कभी आओ, कभी जाओ।  मैं कभी आऊँ, कभी जाऊँ। ये रोना-  धोना, किसी के लिए सोचना, किसी एक का हो जाना। परिवार, बंधन, जकड़न।  ऑल फुलिशनेस।”

“एलिसा बातों में इतना वक्त बरबाद कर दिया। इन लोगों पर रिसर्च करते- करते तुम कहीं उस सदी में न पहुँच जाना।

“सैम यह बताओ उस मानव का क्या हुआ जिसे कल हॉस्पिटलाइज किया था। ऐना बोल रही थी सारी प्रोग्रामिंग सैट होने के बाद भी वो कुछ अजीब व्यवहार कर रहा है।

 “उसके दिमाग़ की स्टडी तुम्हीं कर रहे हो?”

“हाँ ! आओ उसकी रिकॉर्डिंग देखते हैं।  देखें कहाँ गड़बड़ी हुई है। मैंने प्रोग्रामिंग तो ठीक सैट की थी।”

“सब कुछ तो सही है। आराम से बैड पर लेटा हुआ है।  रोबोट उसकी अटमोस्ट केयर कर रहे हैं।”

“हाँ देखो, रोबोट ईशा पूरी शिद्दत से सेवा कर रही है।  वक्त पर मेडीसिन, खाने- पीने के कैप्सूल। फिर प्रॉब्लम कहाँ है ? तबियत में सुधार क्यों नहीं हो रहा?’’

“रिकॉर्डिंग रिमाइंड करो एलिसा। सब तो टाइम पर कर रही है ईशा। इवन टाइमिंग के अकॉर्डिंग बातें भी।  फिर प्रॉब्लम कहाँ है?”

“यह देखो। उसके चेहरे पर बेजारी। अरे यह आँखों में क्या दिख रहा है?”

“सैम देखो !वो आवाज लगा ईशा को रोक रहा है। शायद सिर दबाने का इशारा किया। ईशा के यंत्रवत हाथ शुरू हो गए हैं। वो ईशा को कुछ कह रहा है लेकिन प्रोग्रामिंग की सैटिंग के अनुसार ईशा बार-  बार बस यही रेस्पॉन्स कर रही है सब वक्त से दिया है।”

“अरे अचानक यह फूट-  फूटकर रोने क्यों लगा एलिसा ?” 

“ओह सैम!इतने प्रयास के बाद भी रोबोट बनते इंसान में अभी तक मानव संवेदनाएँ बाकी हैं।”

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